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भारतीय ओलंपिक संघ ने तथाकथित आरोपी को किया नियुक्त, विवादों को दिया आमंत्रण
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 13 Jan 2018 10:19 PM IST
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आईओसी
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने शुक्रवार को पवनदीव सिंह कोहली को मेडिकल कमिशन का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। पवनदीव सिंह कोहली को यह पद दिए जाने के बाद खेल समिति को कई तरह की आलोचाओं का सामना करना पड़ सकता है। बताते चलें कि पवनदीप सिंह कोहली अनुभवी स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर (खेल प्रशासक) त्रलोचन सिंह के बेटे हैं।
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दरअसल रियो ओलंपिक में पवनदीप सिंह को भारतीय खिलाड़यों के दल का चीफ मेडिकल ऑफिसर बनाकर भेजा गया था। इस दौरे पर रहते हुए एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि पवनदीप सिंह पेशे से एक साधारण रेडियोलॉजिस्ट हैं, जो खेल के दौरान इंजरी होने पर खिलाड़ियों को थोड़ी बहुत राहत देने का काम करते हैं।
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इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि पवनदीप सिंह देश के टॉप क्लास एथलीटों को दर्द से राहत देने के लिए 'कॉम्बीफ्लेम' जैसी टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं। यह मामला उस वक्त सामने आया था, जब महिला रेसलर विनेश फोगाट को खेलते हुए घुटने में गंभीर चोट आ गई थी।
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हालांकि यह शिकायत सामने आने के बाद त्रलोचन सिंह अपने बेटे के बचाव में आगे आए थे। उन्होंने कहा था कि पवनदीप सिंह गुवाहाटी और शिलॉन्ग में हुए एएसएफ गेम्स में मेडिकल टीम के प्रमुख रह चुके हैं। इसके अलावा वह कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडिकल कमिशन का हिस्सा भी रह चुके हैं। अपने बेटे का पक्ष लेत हुए उन्होंने कहा था कि पवनदीप सिंह एक अनुभवी चिकित्सक हैं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इसके बाद पवनदीप सिंह समेत एक अन्य चिकित्सक आरएस नेगी के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की थी। बता दें कि आरएस नेगी पर भी पवनदीप सिंह की तरह एक रेडियोलॉजिस्ट होने के आरोप लगे थे। इन दोनों ही लोगों पर स्पोर्ट्स मेडिसिन से संबंधित एक्सपीरियंस और क्वालिफिकेशन न होने के आरप लगे थे। हालांकि यह आरोप लगने के बाद 24 जुलाई से 23 अगस्त 2016 तक चलने वाले गेम्स में उन्हें खिलाड़ियों के साथ भेजा गया था।