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गली-मोहल्ले से आगे निकले गुल्ली डंडा और पिट्ठू, पारंपरिक खेलों की राष्ट्रीय चैंपियनशिप
Sat, 09 Jan 2021 11:04 AM IST
अंशुल तलमले
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अंशुल तलमले
Updated Sat, 09 Jan 2021 11:04 AM IST
सार
- नियमों को कराया जा रहा है रजिस्टर्ड
- बनाए जाएंगे इन खेलों के खेल संघ
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भारत के पारंपरिक खेल
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
गुल्ली डंडा, कंचे, पिट्ठू और लट्टू अब गली मोहल्ले के खेल नहीं रहेंगे। निकट भविष्य में कबड्डी और खो-खो की तरह इन खेलों के राज्य और राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले कराए जाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए न सिर्फ इन खेलों के नियमों को रजिस्टर्ड कराकर आधिकारिक रूप दिया जा रहा है बल्कि जल्द ही इनके राष्ट्रीय खेल संघ स्थापित किए जाएंगे, जिनकी जिम्मेदारी राज्य और राष्ट्रीय चैंपियनशिप कराने की होगी।
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खेल मंत्रालय ने खो-खो और मलखंब जैसे देश के पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने की घोषणा की है, लेकिन खो-खो फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और भारतीय ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष सुधांशु मित्तल ने गुमनामी में खोते जा रहे गुल्ली डंडा, कचे, लट्टू और पिट्ठू जैसे खेलों को नया जीवन देने का बीड़ा उठाया है।
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मित्तल साफ करते हैं कि इसके लिए उन्होंने काम शुरू कर दिया है। वह पहले इन सभी खेलों के नियमों को तैयार करवा रहे हैं। एक बार नियम तैयार हो जाएं उसके बाद इन खेलों के खेल संघ स्थापित किए जाएंगे। फिर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप कराने का रास्ता साफ हो जाएगा।
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एक बार इन खेलों की चैंपियनशिप कराई गई तो इनकी लोकप्रियता फिर से बहाल होने लगेगी। बचपन में सभी ने इन खेलों को खेला है और देखा है, लेकिन वर्तमान में शहरों के बच्चों से खेल दूर हो गए हैं। यही कारण है कि उन्होंने इन पारंपरिक खेलों पर इस दिशा में काम करने की शुरूआत की है।