खेल संघों पर काबिज रहेंगे मंत्री और नौकरशाह, संशोधित स्पोर्ट्स कोड ठंडे बस्ते में गया
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) और राष्ट्रीय खेल संघों से मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और नौकरशाहों की फिलहाल छुट्टी नहीं होने जा रही है। इन सभी को खेल संघों से बाहर करने की सिफारिश करने वाला स्पोर्ट्स कोड ठंडे बस्ते में चला गया है। फिर नई कमेटी गठित की जाएगी और नए सिरे से स्पोर्ट्स कोड की सिफारिशें लिखी जाएंगी। तब तक 2011 का स्पोर्ट्स कोड प्रभावी रहेगा। यह सब खेल मंत्री किरेन रिजिजू की पहल पर हुआ है।
खेल मंत्री ने आईओए और खेल संघों के साथ शुक्रवार को हुई बैठक में साफ किया कि उनका इनसे अदालती लड़ाई का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने 2028 के ओलंपिक में शीर्ष दस में आने के लक्ष्य के लिए मंत्रालय और खेल संघों को एक साथ आने के लिए कहा।
कोड की खिलाफत की तैयारी से गया था आईओए
आईओए और खेल संघ संशोधित स्पोर्ट्स कोड की खिलाफत के लिए पूरी तैयारी के साथ गए थे। सूत्रों का कहना है कि आमराय यहां तक बनी थी कि अगर स्पोर्ट्स कोड को लेकर मंत्रालय अड़ियल रवैया अपनाता है तो बैठक का बायकाट कर दिया जाएगा। पर खेलमंत्री ने बैठक शुरू होने से पहले ही साफ कर दिया कि मंत्रियों और नौकरशाहों को बाहर करने का उनका इरादा नहीं है।
कोड के लिए कमेटी पर कमेटी
2011 में स्पोर्ट्स कोड सामने आया था और इसमें सुधार की कोशिशें की जा रही हैं। 2015 में सीके महाजन कमेटी ने इसमें सुधार किए। 2017 में बिंद्रा की कमेटी ने इसे संशोधित कर बेहद कड़ा किया। अब फिर नई कमेटी।
चैंपियनशिप के लिए बढ़ाओ पैसा
खेल मंत्री ने खेल संघों से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप का आयोजन करने को कहा। इस पर कुश्ती संघ ने कहा कि सरकार से मिलने वाली मदद नाकाफी है। मेजबानी हासिल करने के लिए यूडब्लूडब्लू को करोड़ों की राशि देनी पड़ती है। मंत्रालय ने मेजबानी के लिए खेल संघों की आर्थिक मदद करने को कहा। साथ ही नेशनल चैंपियनशिप के लिए की जाने वाली मदद को बढ़ाने की मांग खेल संघों ने रखी। मंत्रालय ने इसे भी मंजूर कर लिया।