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' 2020 नहीं 2028 के ओलंपिक की तैयारी करे भारत '
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 24 Aug 2016 10:43 PM IST
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अंजू
- फोटो : getty
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पूर्व भारतीय एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज का मानना है कि भारत को ओलंपिक में ज्यादा पदक जीतने के लिए दूरदर्शी योजनाओं पर काम करना होगा। भारत के लिए विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पहला पदक जीतने वाली अंजू का मानना है कि अब तक सबसे बड़े ओलंपिक दल के रियो जाने के बावजूद भारत केवल दो पदक हासिल कर सका। एथलेटिक्स में ललिता बाबर ने नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए 3 हजार मीटर स्टिपल चेज के फाइनल में जगह बनाई इसके अलावा और कोई भारतीय एथलीट ओलंपिक में अपनी छाप नहीं छोड़ सका।
अंजू का मानना है कि भारतीय एथलीट्स की असफलता का कारण खेलों के विकास की दूरदर्शी योजना नहीं होना है। मुझे लगता है कि कई देशों ने 2020 के टोकियो ओलंपिक के लिए तैयारी 2008 या उससे पहले शुरू कर दी होगी, इसलिए हमें भी 2020 से आगे देखना होगा। इस बात की आलोचना भी हो सकती है लेकिन खेलों में सफल होने का यही तरीका है।
अंजू के अनुसार लंबी योजनाओं का अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ समन्वय बनाकर ही हम अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। इस चीच की वर्तमान दौर में कमी है, खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लेने का मौका नहीं मिल रहा है। अव्यवस्थित योजनाओं की वजह से पदक जीतने की संभावनाओं की दमन हो जाता है। सर्वश्रेष्ठ भारतीय एथलीट्स को ट्रेनिंग के अतिरिक्त यूरोपियन सर्किट में होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेना चाहिए। इन प्रतियोगिताओं का आयोजन हर साल मई से सितंबर के बीच होता है। इनमें भाग लेकर हम ओलंपिक जैसी प्रतियोगिताओं के लेकर अपनी तैयारियों का आकलन कर सकते हैं।
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इसके अलावा हमें बेंच स्ट्रेंथ तैयार करने पर जोर देना चाहिए। हमारा ध्यान केवल खिलाड़ियों के कोर ग्रुप पर होता है और खिलाड़ियों के अगले बैच को नजरअंदाज करते हैं जो कि ठीक नहीं है। जबकि खिलाड़ियों के तीन समूहों को लेकर हमें तैयारी करनी चाहिए। इससे हमें टॉप पांच एथलीट्स के बीच के प्रदर्शन के अंतर को कम करने में मदद मिलेगी। घरेलू स्तर पर अच्छी प्रतिस्पर्धा का फायदा हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिलेगा। इसके लिए हमें 10 से 12 साल के बच्चों में से अच्छे खिलाड़ियों का चुनाव करके उन्हें प्रशिक्षित करना चाहिए। क्योंकि किसी भी खेल के तकनीकि ज्ञान के बगैर आप बहुत आगे तक नहीं जा सकते। जब खिलाड़ी तकनीकि रूप से बेहतर होंगे उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की संभावनाएं उतनी अधिक होंगी।
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अंजू का मानना है कि भारतीय एथलीट्स की असफलता का कारण खेलों के विकास की दूरदर्शी योजना नहीं होना है। मुझे लगता है कि कई देशों ने 2020 के टोकियो ओलंपिक के लिए तैयारी 2008 या उससे पहले शुरू कर दी होगी, इसलिए हमें भी 2020 से आगे देखना होगा। इस बात की आलोचना भी हो सकती है लेकिन खेलों में सफल होने का यही तरीका है।
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अंजू के अनुसार लंबी योजनाओं का अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ समन्वय बनाकर ही हम अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। इस चीच की वर्तमान दौर में कमी है, खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लेने का मौका नहीं मिल रहा है। अव्यवस्थित योजनाओं की वजह से पदक जीतने की संभावनाओं की दमन हो जाता है। सर्वश्रेष्ठ भारतीय एथलीट्स को ट्रेनिंग के अतिरिक्त यूरोपियन सर्किट में होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेना चाहिए। इन प्रतियोगिताओं का आयोजन हर साल मई से सितंबर के बीच होता है। इनमें भाग लेकर हम ओलंपिक जैसी प्रतियोगिताओं के लेकर अपनी तैयारियों का आकलन कर सकते हैं।
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इसके अलावा हमें बेंच स्ट्रेंथ तैयार करने पर जोर देना चाहिए। हमारा ध्यान केवल खिलाड़ियों के कोर ग्रुप पर होता है और खिलाड़ियों के अगले बैच को नजरअंदाज करते हैं जो कि ठीक नहीं है। जबकि खिलाड़ियों के तीन समूहों को लेकर हमें तैयारी करनी चाहिए। इससे हमें टॉप पांच एथलीट्स के बीच के प्रदर्शन के अंतर को कम करने में मदद मिलेगी। घरेलू स्तर पर अच्छी प्रतिस्पर्धा का फायदा हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिलेगा। इसके लिए हमें 10 से 12 साल के बच्चों में से अच्छे खिलाड़ियों का चुनाव करके उन्हें प्रशिक्षित करना चाहिए। क्योंकि किसी भी खेल के तकनीकि ज्ञान के बगैर आप बहुत आगे तक नहीं जा सकते। जब खिलाड़ी तकनीकि रूप से बेहतर होंगे उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की संभावनाएं उतनी अधिक होंगी।