अधिकारियों की संख्या को लेकर जारी है घमासान, रियो के लिए हो रही देरी
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रियो ओलंपिक में भारतीय दल के साथ अधिक से अधिक टीम ऑफिशियल (कोच, सपोर्ट स्टाफ, मैनेजर) भेजने को लेकर इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) और खेल संघों में घमासान छिड़ गया है।
यह घमासान इस हद तक पहुंच गया है कि आईओए के पदाधिकारी दो गुटों में बंट गए हैं और अंदरूनी राजनीति चरम पर पहुंच गई है। विवाद के चलते ओलंपिक के आयोजन में एक माह से कम समय बचा होने के बावजूद अब तक रियो जाने वाला भारतीय दल अंतिम रूप नहीं ले पाया है।
नतीजतन भारतीय टीमों के रियो पहुंचने का कार्यक्रम बाधित हो रहा है। यहां तक अब तक टीम ऑफिशियल्स के टिकट बुक नहीं कराए जा सके हैं।
दरअसल पहले आईओए ने निर्देश दिए थे ओलंपिक क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों की आधी संख्या में टीम ऑफिशियल भारतीय दल का हिस्सा बनेंगे, लेकिन हाल ही में आईओए ने निर्देश दिए हैं कि अब टीम ऑफिशियल की संख्या कुल भारतीय दल की 40 प्रतिशत होगी।
हॉकी इंडिया इसको लेकर खुले आम आवाज बुलंद कर चुका है। उनका तर्क है कि महिला और पुरुष हॉकी टीम में 32 खिलाड़ी होंगे ऐसे में टीम ऑफिशियल्स की संख्या 16 होगी। आईओए के एक गुट ने इसे खारिज करते हुए 40 प्रतिशत करने को कहा है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि दूसरे गुट ने पुरुष हॉकी टीम के साथ आठ ऑफिशियल्स को मंजूरी दे दी है।
सानिया के साथ उनकी मम्मी भी जा रही हैं रियो
यही नहीं टेनिस में खिलाड़ी चार जा रहे हैं, लेकिन ऑफिशियल्स की संख्या पांच दी गई है। इनमें सानिया की मां नसीमा मिर्जा के साथ उनके और रोहन बोपन्ना के निजी कोच शामिल हैं।
इसी तरह बैडमिंटन में सात खिलाड़ी रियो जा रहे हैं, लेकिन ऑफिशियल्स पांच भेजने को कहे जा रहे हैं। कुश्ती में पहले तीन कोच के साथ एक फीजियो भेजने की बात कही गई थी, लेकिन अब फीजियो के स्थान पर फेडरेशन के एक पदाधिकारी का नाम बतौर मैनेजर भेजा गया है।
इन स्थितियों के चलते ही अब तक भारतीय दल तय नहीं हो पाया है। हालांकि खेल मंत्रालय और साई के साथ टिकट बुकिंग को बैठकों का दौर जारी है। बावजूद इसके कोई हल नहीं निकल पा रहा है। हार कर मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि ग्रुप में टिकटों की बुकिंग करा दी जाए, जिससे महंगे हो रहे टिकटों के अतिरिक्त खर्च से बचा जा सके।
सूत्र बताते हैं कि टीम ऑफिशियल्स को लेकर जल्द तालमेल नहीं बना तो आईओए की गुटबाजी खुलकर सतह पर आ सकती है।