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दादी के गुजर जाने पर भी नहीं गए घर, अब 15 साल के जेरमी ने जीता यूथ ओलंपिक गोल्ड

Thu, 11 Oct 2018 08:56 AM IST
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला Updated Thu, 11 Oct 2018 08:56 AM IST
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gold medallist jeremy lalrinnunga did not go home even his grandmother expired
Jeremy Lalrinnunga

यह बीते माह की ही बात है, आईजोल (मिजोरम) के जेरमी लालरिनुंगा यूथ ओलंपिक के लिए एनआईएस पटियाला में तैयारियों में जुटे थे। उनके पिता ललनेई लुआंगा का फोन आया कि उनकी दादी का निधन हो गया है। उन्होंने यह बात अपने कोच विजय शर्मा को बताई। कोच पसोपेश में पड़ गए। 

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यूथ ओलंपिक का ट्रायल सिर पर था, अगर जेरमी आईजोल जाते तो ट्रेनिंग पर बुरा असर पड़ता। कोच ने उनके सामने सारी बात रखी। जेरमी को अपने दादा-दादी से बेहद लगाव है, लेकिन उन्होंने घर नहीं जाने का फैसला लेकर यूथ ओलंपिक की तैयारियों में जुटने का निर्णय लिया। 
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आखिरकार जेरमी का त्याग सोमवार की रात (भारत में मंगलवार तड़के) रंग लाया। 15 साल के इस लिफ्टर ने ब्यूनस आयर्स में इतिहास रचते हुए यूथ ओलंपिक का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। यह कारनामा अंजाम देने वाले वह देश के पहले खिलाड़ी हैं। ठीक वैसे ही जिस तरह अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक में देश के लिए पहला व्यक्तिगत स्वर्ण जीता था। 
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जेरमी ने गोल्ड जीतने के बाद अमर उजाला से खुलासा किया कि उस वक्त यह फैसला लेना उनके लिए बेहद कठिन था। एक साल से अधिक हो गया है वह घर नहीं गए हैं सिर्फ इसी दिन को देखने के लिए। यही कारण है कि जेरमी ने यह गोल्ड मेडल देशवासियों के साथ अपने दादा-दादी और कोच को समर्पित कर दिया। 

घुटने में आया खिचाव फिर किया सर्वश्रेष्ठ 

स्नैच में कुल 124 किलो वजन उठाने के बाद क्लीन एंड जर्क की 143 किलो की पहली लिफ्ट उठाते ही जेरमी का गोल्ड पक्का हो गया। इसके बाद कोच विजय ने फैसला लिया कि जेरमी को उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराना है। दूसरी लिफ्ट उन्हें 147 की दी गई, लेकिन यहीं उनके घुटने में खिचाव आ गया और वह तढ़फ उठे। 

कोच ने वार्म अप एरिया में जेरमी के घुटने की मालिश की। वह तीसरी लिफ्ट लेने की स्थिति में नहीं थे, लेकिन जेरमी ने कहा कि वह ठीक महसूस कर रहे हैं और तीसरा प्रयास करेंगे। खुद जेरमी ने कोच से कहा कि वह 150 का प्रयास करेंगे। कोच ने भी हामी भर दी और जेरमी ने यह वजन उठाकर अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को अंजाम दे डाला। 

जेरमी ने कुल 274 किलो वजन उठाया जो गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में एम राजा की ओर से उठाए गए 266 किलो से भी अधिक था। रजत जीतने वाले तुर्की के तोपतास कानेर 263 किलो वजन के साथ उनसे 11 किलो पीछे थे। कोलंबिया के विलार मांजेरे ने 260 किलो के साथ कांस्य जीता। जेरमी ने यूथ और जूनियर राष्ट्रीय रिकार्ड भी भंग कर डाला।  

एकेडमी बंद हुई तो बॉक्सर से बन गए वेटलिफ्टर 

जेरमी के मुताबिक नौ साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता की बॉक्सिंग एकेडमी में ट्रेनिंग शुरू की। उनके पिता राष्ट्रीय जूनियर और सब जूनियर बॉक्सिंग के चैंपियन रह चुके थे, लेकिन पैसे के आभाव में यह एकेडमी बंद करनी पड़ी। 

इसके बाद ही वह 2012 में बॉक्सिंग छोड़ वेटलिफ्टिंग एकेडमी चले गए। दो माह बाद ही उन्होंने एएसआई पुणे में आर्मी ब्वाएज स्कीम के तहत ट्रायल दिया। वहां उनका चयन हो गया। 


जेरमी ने एक साल तक शुरूआत में बांस के डंडे और आठ किलो की लोहे की रॉड से ट्रेनिंग की। इसके बाद उन्होंने दो बार विश्व यूथ वेटलिफ्टिंग रजत जीता। खेलो इंडिया का स्वर्ण जीता और टॉप्स में शामिल हुए।

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