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कुश्ती: द्रोणाचार्य पुरस्कार की सूची से कोच जगरूप सिंह राठी का नाम हटाने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केन्द्र को भेजा नोटिस
Fri, 12 Nov 2021 03:16 PM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Fri, 12 Nov 2021 03:16 PM IST
सार
कुश्ती कोच जगरूप सिंह राठी का नाम द्रोणाचार्य पुरस्कार की सूची से हटाने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस भेजा है। उन्हें आजीवन श्रेणी में द्रोणाचार्य पुरस्कार मिल सकता था, लेकिन केन्द्र सरकार और खेल मंत्रालय ने बाद में उनका नाम सूची से हटा दिया था।
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जगरूप सिंह राठी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
दिल्ली हाई कोर्ट ने आजीवन श्रेणी में द्रोणाचार्य पुरस्कार की सूची से कुश्ती कोच जगरूप सिंह राठी का नाम हटाने पर केन्द्र सरकार को नोटिस भेजा है। राठी का नाम पहले इस सूची में शामिल था, लेकिन बाद में उनका नाम हटा दिया गया था। इसके बाद जगरूप सिंह राठी ने दिल्ली हाई कोर्ट में उनका नाम हटाने को लेकर याचिका दायर की थी। इस याचिका में सुनवाई के बाद केन्द्र सरकार और खेल मंत्रालय को नोटिस भेजा गया है।
आजीवन श्रेणी में दोणाचार्य पुरस्कार की सूची में जगरूप सिंह राठी को दोणाचार्य पुरस्कार मिलना था। उन्होंने कुश्ती कोच के रूप काफी अहम योगदान दिया है और अपनी बेटी को भी पहलवान बनाया। इसके बावजूद उन्हें साल 2021 में आजीवन श्रेणी में द्रोणाचार्य पुरस्कार नहीं मिला।
फरीदाबाद के जगरूप सिंह राठी पहले पहलवान थे और डीएसपी भी रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बेटी नेहा राठी को खुद कुश्ती के दांव-पेंच सिखाकर अंतर्राष्ट्रीय पहलवान बनाया है। जगरूप सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हैं और अर्जुन अवार्ड भी हासिल कर चुके हैं। नेहा फिलहाल पुलिस में काम करती हैं और उन्हें भी अर्जुन अवार्ड और भीम अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। जगरूप सिंह राठी के पिता दरियाव सिंह और उनके दादा चौधरी सुलतान सिंह भी अपने समय के नामी पहलवान थे। दादा-पिता की विरासत को जगरूप सिंह ने संभाला था। जगरूप सिंह अपने बेटे को भी पहलवान बनाना चाहते थे, पर बेटे ने पहलवानी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने नेहा को पहलवान बनाया।
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आजीवन श्रेणी में दोणाचार्य पुरस्कार की सूची में जगरूप सिंह राठी को दोणाचार्य पुरस्कार मिलना था। उन्होंने कुश्ती कोच के रूप काफी अहम योगदान दिया है और अपनी बेटी को भी पहलवान बनाया। इसके बावजूद उन्हें साल 2021 में आजीवन श्रेणी में द्रोणाचार्य पुरस्कार नहीं मिला।
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बेटी को भी बनाया पहलवानDelhi High Court issues notice to Centre and others on a petition filed by wrestling coach Jagrup Singh Rathi challenging the Sports Ministry decision to exclude him from Dronacharya Award in Lifetime Category for the year 2021 pic.twitter.com/5KQ3mkWZDP
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) November 12, 2021
फरीदाबाद के जगरूप सिंह राठी पहले पहलवान थे और डीएसपी भी रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बेटी नेहा राठी को खुद कुश्ती के दांव-पेंच सिखाकर अंतर्राष्ट्रीय पहलवान बनाया है। जगरूप सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हैं और अर्जुन अवार्ड भी हासिल कर चुके हैं। नेहा फिलहाल पुलिस में काम करती हैं और उन्हें भी अर्जुन अवार्ड और भीम अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। जगरूप सिंह राठी के पिता दरियाव सिंह और उनके दादा चौधरी सुलतान सिंह भी अपने समय के नामी पहलवान थे। दादा-पिता की विरासत को जगरूप सिंह ने संभाला था। जगरूप सिंह अपने बेटे को भी पहलवान बनाना चाहते थे, पर बेटे ने पहलवानी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने नेहा को पहलवान बनाया।