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D Gukesh Story: 11 साल पहले देखा था विश्व विजेता बनने का सपना, चाट-पानीपुरी खाना पसंद, बाहुबली-2 पसंदीदा फिल्म

Sat, 14 Dec 2024 08:36 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Sat, 14 Dec 2024 08:36 AM IST
सार

शतरंज के मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश ने महज सात साल की उम्र में चेन्नई में कार्लसन के हाथों विश्वनाथन आनंद की हार देखकर ही शतरंज की दुनिया का सरताज बनने का लक्ष्य बना लिया था। कॉमिक्स और यू-ट्यूब पर वीडियो देखने के शौकीन डी गुकेश ने सिर्फ 18 वर्ष की उम्र में विश्व चैंपियन बनकर पूरी दुनिया को बता दिया है कि शह और मात के खेल की इस सनसनी को रोकना अब आसान नहीं।

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D Gukesh Story: Likes to eat chaat panipuri, favorite movie Bahubali 2; Know more about chess world champion
गुकेश के माता पिता - फोटो : Twitter

विस्तार

चेन्नई में नवंबर 2013 में हुई विश्व शतरंज चैंपियनशिप में 64 खानों के दिग्गज खिलाड़ी अपनी बादशाहत साबित करने के लिए जुटे थे। 19 दिन चले इस टूर्नामेंट को देखने के लिए कई शतरंज प्रेमी भी पहुंचे। इनमें दुबला-पतला एक सात साल का बच्चा भी था, जिसने तत्कालीन चैंपियन विश्वनाथन आनंद और मैग्नस कार्लसन को खिताब के लिए जूझते देखा। इस टूर्नामेंट में कार्लसन की जीत बच्चे के दिलो-दिमाग में इस तरह घर कर गई कि उसने तय कर लिया कि एक दिन वह भी शतरंज का सरताज बनेगा। पूरे जोश और जज्बे के साथ एक दशक तक तैयारी में जुटा रहने वाला वह बच्चा कोई और नहीं, बल्कि हाल ही में सिंगापुर में विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाले 18 वर्ष के डोम्माराजू गुकेश यानी डी गुकेश हैं। गुकेश विश्व चैंपियन बनने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
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गुकेश के माता पिता - फोटो : Twitter
कंप्यूटर से ज्यादा खुद पर भरोसा
29 मई, 2006 को चेन्नई के तेलुगू परिवार में पैदा हुए डी गुकेश दिमागी कसरत के इस खेल के काफी चतुर खिलाड़ी हैं। वह आक्रामक के साथ ही रक्षात्मक और शांति से खेलने में माहिर हैं। कोच विष्णु प्रसन्ना कहते हैं कि इस बच्चे ने सामान्य बच्चों की तरह अपना बचपन नहीं जिया है। अन्य खिलाड़ी खेल के बीच में थोड़ा भी गैप मिलने पर मस्ती के मूड में आ जाते हैं, लेकिन गुकेश एक मैच खत्म होते ही दूसरे की तैयारी में जुट जाते हैं। अन्य खिलाड़ी ज्यादातर कंप्यूटर पर निर्भर रहते हैं, जबकि गुकेश कंप्यूटर का सहारा लेने के साथ ही अपनी खुद की रणनीति पर अधिक भरोसा करते हैं।
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गुकेश के माता पिता - फोटो : Twitter
नौ साल में एशिया चैंपियन
डॉ. रजनीकांत ने अपने इकलौते बेटे गुकेश का दाखिला चेन्नई के वेलेमल विद्यालय में करवाया। उन्होंने लगभग सात साल की उम्र में गुकेश को समर कैंप में भेजा। कैंप के दौरान कई खेलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा था, लेकिन गुकेश चेस बोर्ड की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे थे। गुकेश ने अपने स्कूल में ही शतरंज सीखना शुरू किया। दो साल बाद ही वह अंडर-9 स्कूल टूर्नामेंट के एशिया चैंपियन बन गए। इसके बाद पिता ने विश्वनाथन आनंद की वेस्टब्रिज आनंद चेस एकेडमी में उन्हें दाखिला दिला दिया। 2017 में पिता ने डॉक्टरी की प्रैक्टिस छोड़ दी और माइक्रोबायोलॉजिस्ट मां पद्मा लक्ष्मी ने घर संभाला।
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डी गुकेश - फोटो : PTI
टर्निंग पॉइंट
डी गुकेश ने मैग्नस कार्लसन को विश्व चैंपियन बनते हुए देखकर ही शतरंज में कॅरिअर बनाने का निश्चय किया था। 2022 में चेन्नई में हुए 44वें शतरंज ओलंपियाड में टॉप बोर्ड पर खेलने वाले गुकेश एकमात्र भारतीय खिलाड़ी थे। उन्होंने यहां स्वर्ण पदक जीता और कार्लसन ने कांस्य पदक। पुरस्कार वितरण के दौरान जब गुकेश को गोल्ड मेडल से नवाजा जा रहा था, तो कार्लसन पदक लेने के लिए पोडियम पर नहीं पहुंचे। यह टूर्नामेंट गुकेश के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

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डी गुकेश - फोटो : PTI
सारे रिकॉर्ड ध्वस्त
डोम्माराजू गुकेश 12 वर्ष 7 माह 17 दिन की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने। अप्रैल, 2024 में कनाडा के टोरंटो में हुए फिडे कैंडिडेट शतरंज का खिताब जीतकर गुकेश ने रूस के गैरी कास्परोव का 40 वर्ष पहले बनाया रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। कास्परोव ने फिडे कैंडिडेट खिताब 20 वर्ष की उम्र में जीता था, जबकि गुकेश ने महज 17 वर्ष की उम्र में ही यह उपलब्धि हासिल कर ली। वहीं अब वह सबसे कम उम्र में विश्व चैंपियन बनने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। कास्परोव 1985 में 22 साल की उम्र में, जबकि गुकेश 18 साल की उम्र में ही विश्व चैंपियन बन गए। विश्वनाथन आनंद के बाद भारत के लिए विश्व चैंपियनशिप जीतने वाले गुकेश दूसरे खिलाड़ी हैं।

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गुकेश, कास्परोव और क्रैमनिक - फोटो : Twitter
कास्परोव ने बताया 'भूकंप'
गुकेश ने फिडे कैंडिडेट खिताब जीतकर विश्वनाथन आनंद और कार्लसन जैसे शतरंज के पंडितों के पूर्वानुमान को भी गलत साबित कर दिखाया। आनंद ने कहा था कि फिडे कैंडिडेट में 2026 तक तो शायद ही कोई भारतीय यह खिताब जीते। लेकिन गुकेश ने न केवल फिडे कैंडिडेट में जीत का परचम लहराया, बल्कि विश्व चैंपियनशिप भी अपने नाम कर लिया। गुकेश के हाथों खुद का रिकॉर्ड ध्वस्त होने से खुश रूस के कास्परोव ने तो उन्हें 'भारतीय भूकंप' तक कह डाला।

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गुकेश - फोटो : PTI
पानीपुरी, टिंकल और बाहुबली-2
गुकेश की पसंदीदा जगह मलयेशिया है। इसे वह ‘धरती पर स्वर्ग’ कहते हैं। उन्हें चाट और पानीपुरी खाना बेहद पसंद है। गुकेश को शतरंज के अलावा क्रिकेट और बैडमिंटन खेलने का भी शौक है। वीकेंड पर या अपने खाली समय में वह यू-ट्यूब पर मीम्स और 'ट्राई नॉट टू लाफ' के वीडियो देखना पसंद करते हैं। बाहुबली-2 उनकी सबसे पसंदीदा फिल्म और टिंकल पसंदीदा कॉमिक्स है।

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लिरेन और डी गुकेश - फोटो : Chess.com
एक दिन में 70 पजल्स
गुकेश के पहले कोच भास्कर वी बताते हैं कि गुकेश को वह शतरंज के 70 पजल्स हल करने के लिए देते थे और सुबह 9:30 से शाम 7:30 बजे तक लगातार अभ्यास करना होता था। गुकेश जब सिर्फ 12 वर्ष की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने, तब उन्होंने 16 महीने की अवधि में 13 देशों में 30 टूर्नामेंटों में 276 गेम्स खेले थे। विश्व विजेता बनने के लिए गुकेश ने पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद, पोलैंड के ग्रेजगोर्ज गजेवस्की के अलावा 2011 की विश्व विजेता भारतीय क्रिकेट टीम और पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के साथ रणनीतिक भूमिका निभाने वाले पैडी अप्टन की भी मदद ली।
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