एशियन वेटलिफ्टिंग: ओडिशा की आदिवासी बिटिया का कमाल, 26 साल बाद देश को दिलाया गोल्ड
उड़ीसा के मयूरभंज जिले के गरीब आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाली झिल्ली दलबेहरा ने 26 साल बाद एशियाई वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में देश को स्वर्ण पदक दिलाया। झिल्ली ने ताशकंद में 45 किलो में कुल 157 किलो वजन उठाकर सोना जीता। हालांकि 2019 की एशियाई चैंपियनशिप में झिल्ली ने 162 किलो वजन उठाया था। तब उन्होंने यहां रजत जीता था।
Daughters of Railways Shine at Asian 🏋🏾 Championship: Hearty Congratulations to Mirabai Chanu on setting a new World Record in Women's 49kg Clean & Jerk.
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Best wishes to Jhilli Dalabehera, Vinesh Phogat, Divya Kakran, Sarita Kumari for winning Gold🥇& Sakshi Malik for Silver🥈 pic.twitter.com/bw3WdgJtkB— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) April 18, 2021
झिल्ली से पहले एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने का कारनामा क़र्णम मल्लेश्वरी और कुंजारानी देवी ने 1995 में एक साथ किया था। तब से अब तक इस चैंपियनशिप में कोई स्वर्ण पदक नहीं जीत पाया। हालांकि 45 किलो ओलंपिक में शामिल नहीं है। कोच विजय शर्मा का कहना है कि कंपटीशन नहीं होने के कारण झिल्ली से ज्यादा जोर नहीं लगवाया। उन्होंने स्नैच में 69 और क्लीन एंड जर्क में 88 किलो वजन उठाया। फिलीपींस की मैरी फ्लोर डियाज ने 135 किलो वजन उठाकर रजत जीता।
बेहद दबाव में थीं मीरा पर इस बार बिखरी नहीं
विश्व कीर्तिमान बनाकर मीराबाई चानू जितनी खुशी महसूस कर रही हैं उससे कहीं ज्यादा राहत उन्हें पहली दो लिफ्ट फेल होने के बाद स्नैच की तीसरी लिफ्ट उठाने पर मिली थी। उस दौरान कोच, फेडरेशन के पदाधिकारी, साथी लिफ्टर सभी की सांसें थमी थीं। यह ठीक रियो ओलंपिक जैसी स्थिति थी। वहां मीरा क्लीन एंड जर्क में वॉश आउट हो गई थीं और एक मेडल देश के हाथ से निकल गया था। मीरा जानती थीं, इस बार ऐसा हुआ तो सब की अंगुलियां उनकी ओर खड़ी हो जाएंगी। उनके साथ कंधे से कंधा मिलकर खड़े रहे फेडरेशन, साई, मंत्रालय सब की गर्दन झुकेगी। यहीं मीरा ने अपने से कहा कि नहीं वह इस बार नहीं बिखरेंगी। उन्होंने प्रण लिया कि वह यह वजन हर हाल में उठएंगी और ऐसा ही किया।
प्रैक्टिस के दम पर विश्व कीर्तिमान का लिया था प्रण
मीरा अमर उजाला से खुलासा करती हैं। दो लिफ्ट फेल होने के बाद उन्हें नहीं समझ में आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है। प्रैक्टिस में 85 किलो वह आराम से उठा लेती हैं। वह दबाव में थीं, लेकिन उन्होंने तीसरी लिफ्ट के दौरान लंबी सांस ली, ध्यान लगाया और अपने आपसे कहा यह लिफ्ट उठानी ही उठानी है। मीरा को मालूम है कि यह नाजुक क्षण थे, लेकिन उन्हें खुशी है कि उन्होंने इस पर जीत पा ली। मीरा कहती हैं कि कंपटीशन से पहले उन्होंने दृढ़निश्चिय लिया था कि वह इस बार विश्व कीर्तिमान बनाएंगी। स्नैच में बिखरने के बाद उन्होंने अपने को एकाग्र कर क्लीन एंड जर्क में ऐसा किया। मीरा के मुताबिक उन्होंने प्रैक्टिस में 120-121 किलो उठाया है। क्लीन एंड जर्क की तीसरी लिफ्ट के दौरान उन्होंने यही सोचा कि वह प्रैक्टिस के लिए ही जा रही हैं।