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हड्डियां टूटीं पर नहीं छोड़ी घुड़सवारी, फुआद बनेंगे अर्जुन अवार्ड लेने वाले देश के पहले घुड़सवार

Thu, 29 Aug 2019 08:20 AM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: Rajeev Rai Updated Thu, 29 Aug 2019 08:20 AM IST
सार

  • अर्जुन अवार्ड हासिल करने वाले देश के पहले असैनिक घुड़सवार होंगे फुआदा मिर्जा
  • छह साल की उम्र में घोड़े से गिरे लगे 12 टांके, बाद में टूटीं शरीर की कई हड्डियां

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Asian games medalist Fouaad Mirza will become first civilian equestrian to win arjuna award
फुआद मिर्जा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फुआद मिर्जा के पिता हसनैन जानवरों के डॉक्टर हैं। रेसकोर्स में उनका आना-जाना आम था। नतीजा यह निकला पांच साल की उम्र में फुआद को घोड़े पर बिठा दिया गया। यह एक जोखिम भरा फैसला था। एक साल बाद ही फुआद को घोड़े ने गिरा दिया। उनकी आंख के नीचे का मांस बुरी तरह फट गया। हड्डी तक दिखाई देने लगी। 12 टांके आए और स्कूल भी छूटा, लेकिन ठीक होते ही बेटे की जिद पर पिता ने एक बार फिर उसे घोड़े पर बिठा दिया। दुर्घटनाओं का सिलसिला थमा नहीं। घोड़े फुआद को गिराते रहे और उनकी एड़ी, छाती की हड्डियां, कोहनी टूटती रहीं, लेकिन उन्होंने घुड़सवारी नहीं छोड़ी। इस घुड़सवार ने जकार्ता एशियाई खेलों में न सिर्फ दो रजत पदक जीते बल्कि बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति के हाथों अर्जुन अवार्ड हासिल करने वाले वह देश के पहले असैनिक (सिविलियन) घुड़सवार बन जाएंगे।

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जर्मनी में घोड़ों को खुद पालते हैं और करते हैं प्रैक्टिस

फुआद 36 साल बाद एशियाई खेलों में व्यक्तिगत इवेंट में पदक जीतने वाले देश के पहले घुड़सवार बने। यह खेल सेना से जुड़े लोगों का माना जाता है, लेकिन फुआद ने इस भ्रम को भी तोड़ दिया कि असैनिक इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं। वह इस वक्त जर्मनी में प्रैक्टिस कर रहे हैं। जहां उन्हें अपने घोड़ों का खुद लालन-पालन करना होता है। फुआद खुलासा करते हैं कि वह घोड़ों को खुद दाना डालते हैं। उन्हें टहलाते हैं और फिर प्रैक्टिस करते हैं। यह बिलकुल आसान काम नहीं है,लेकिन यह उनकी अब दिनचर्या बन गई है।

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चुनौती ओलंपिक क्वालिफाई करने की

फुआद के सामने सबसे बड़ी चुनौती टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने की है। अंतिम बार ओलंपिक में भारत का कोई घुड़सवार साल 2000 में खेला था। दिक्कत यह है कि फुआद को जिस घोड़े सिगुन्यूर मेडीकॉट ने जकार्ता में दो रजत पदक दिलाए थे वह बुरी तरह चोटिल हो गया है। वह किसी भी कीमत पर टोक्यो ओलंपिक नहीं जा सकता है। फुआद के पास दो अन्य घोड़े हैं। उनका कहना है कि नए घोड़े से ही वह ओलंपिक क्वालिफाई करने का लक्ष्य हासिल करेंगे।

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