एशियन गेम्स 2018: केरल की भयानक बाढ़ में फंसा परिवार, फिर भी सज्जन प्रकाश ने रचा इतिहास
किसी को अगर यह मालूम हो कि उसका पूरा परिवार बाढ़ में फंसा है और उनके बारे में उसे कुछ भी पता नहीं है तो खेलना तो दूर उसकी रातों की नींद जरूर उड़ जाएगी। लेकिन तैराकी में सर्वाधिक राष्ट्रीय कीर्तिमान रचने वाले केरल के सज्जन प्रकाश ने इस मुश्किल की घड़ी में अपने को चट्टान सा मजबूत करते हुए रविवार को एशियाई खेलों में इतिहास रच डाला।
यह इतिहास था 32 साल बाद किसी भारतीय तैराक के एशियाई खेलों की 200 मीटर बटरफ्लाई के फाइनल में पहुंचने का। 1986 के सियोल एशियाड में खजान सिंह ने 200 मीटर बटरफ्लाई में रजत जीता था। अमर उजाला के सामने सज्जन के मुंह से यही निकलता है कि उन्हें कुछ नहीं मालूम है कि उन्हें पालने पोसने वाले उनके नाना-नानी और मामा कहां हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इडुकी में सब कुछ उजड़ चुका है। उन्हें सिर्फ यही बताया कि परिवार को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा है।
बचपन से पिता से अलग रहते हुए ननिहाल में पलने वाले सज्जन के चेहरे पर परिवार को लेकर तनाव साफ दिख रहा था। वह खुलासा करते हैं कि उन्हें रात भर नींद नहीं आई। एक तो सुबह इवेंट में उतरने का तनाव और दूसरा परिवार को लेकर कोई खबर नहीं होना, लेकिन यहां बीते दिनों नामी कोच ग्राहम हिल के संरक्षण में दक्षिण अफ्रीका में बेहद विपरीत परिस्थतियों में की गई ट्रेनिंग काम आई।
उन्होंने नावों के बीच बिना पैडल के घंटों तैराकी अभ्यास किया। इसने उन्हें शांत रहना सिखाया। यही वजह थी कि उन्हें रात भर नींद जरूर नहीं आई, लेकिन वह इन हालातों में भी अपने को शांत रखने में कामयाब हुए। सज्जन बताते हैं कि उन्हें उम्मीद थी कि वह हीट में 1.59.00 मिनट का समय निकालेंगे, लेकिन उन्होंने 1.58.12 मिनट का समय निकालकर तीसरे स्थान पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाई।
मां ने भी सज्जन को कुछ नहीं बताया
पूर्व अंतरराष्ट्रीय एथलीट वी शांतिमोल के 25 वर्षीय बेटे सज्जन के मुताबिक उनकी मां तमिलनाडु में हैं, लेकिन उन्होंने भी उन्हें परिवार के बारे में कुछ नहीं बताया है। मां को लगता है कि वह परेशान होंगे और अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। अब उन्हें परिवार के हालात के बारे में तभी पता लगेगा जब वह जकार्ता से वापस देश पहुंचेंगे।