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संन्यास के बाद निशानेबाज बिंद्रा करेंगे नए करियर की शुरुआत
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 10 Aug 2016 03:55 PM IST
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अभिनव बिंद्रा, रियो ओलिम्पिक
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बीजिंग ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा को पता था कि सोमवार को उनके शानदार करियर का अंतिम दिन है। वह संन्यास की घोषणा पहले ही कर चुके थे। बावजूद इसके उन्होंने नजदीकी अंतर से पदक से वंचित रहने के बावजूद अपनी भावनाओं का इजहार नहीं किया।
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पांचवां ओलंपिक खेलने वाले बिंद्रा ने कहा, "मैं मीडिया के सामने भावुक नहीं होना चाहता। शांत रहना और अधीर न होना मेरा दायित्व है। मुझे पता था कि मेरे संन्यास का दिन आ गया है। मैंने अपना श्रेष्ठ करने का प्रयास किया लेकिन पदक नहीं जीत सका लेकिन संन्यास के फैसले को लेकर मुझे कोई पछतावा नहीं हैं। मैं सूकुन से हूं।"
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जल्द ही 34 साल के होने जा रहे बिंद्रा ने कहा कि अब फिर से शूटिंग रेंज में जाने का कोई चांस नहीं है। वह अपने संन्यास की घोषणा कर चुके हैं। इस फैसले पर पुनर्विचार का सवाल नहीं। अब वह अपनी फाउंडेशन के जरिए 30 युवा निशानेबाजों की मदद कर रहे हैं। वह जो कर सकता है उसे करने की कोशिश जरूर करेंगे।
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संन्यास के बाद अब अभिनव क्या करेंगे। यह सवाल सभी के जेहन में है। इस सवाल पर अभिनव के पिता डॉ. ए एस बिंद्रा ने कहा था उनके 13 एकड़ के फॉर्म हाऊस में वातानुकूलित शूटिंग रेंज है। अगर बिंद्रा शूटिंग रेंज में नहीं जाएगा तो उसका क्या होगा। इस पर अभिनव ने तपाक से जवाब दिया हम उसे सब्जियों के बगीचे में बदल देंगे। हो सकता है कि टोक्यो ओलंपिक (2020) में यदि मुझे नौकरी मिली तो वह एक पत्रकार के तौर पर ओलंपिक में जाएं।
जर्मन प्रशिक्षक ने की बिंद्रा की जमकर तारीफ
निशानेबाज अभिनव बिंद्रा
- फोटो : file photo
भारतीय शूटर अभिनव बिंद्रा के तकनीकी प्रशिक्षक जर्मनी के हींज रेंकेमायर का कहना है कि अभिनव बेशक पदक नहीं जीत सके लेकिन उनका प्रदर्शन शानदार था। उन्होंने स्वर्ण पदक के लिए भारतीय मीडिया की बेताबी को समस्यापूर्ण बताया।
हींज ने कहा कि मीडिया के साथ दिक्कत यह है कि उन्हें खेल या व्यक्तिगत रूप से खिलाड़ियों में कोई दिलचस्पी नहीं। उन्हें तो बस गोल्ड चाहिए।
उन्होंने कहा कि शायद ऐसा भारत में ही होता है। आपके पास यूरोप या चीन जैसी सुविधाएं नहीं हैं और आप बार-बार यह दुखड़ा रोते रहते हैं कि आपको गोल्ड नहीं मिलता। आपको यह समझना चाहिए कि अच्छे प्रदर्शन की सराहना होनी चाहिए। उसका अपना महत्व होता है। पदक नहीं आया तो बिंद्रा का प्रदर्शन शानदार था। बिंद्रा तीसरे स्थान के लिए हुए शूटऑफ में यूक्रेन के कुलिश से हार गए थे। हींज ने कहा कि कई बार आपका किस्मत भी साथ नहीं देती।
हींज ने कहा कि मीडिया के साथ दिक्कत यह है कि उन्हें खेल या व्यक्तिगत रूप से खिलाड़ियों में कोई दिलचस्पी नहीं। उन्हें तो बस गोल्ड चाहिए।
उन्होंने कहा कि शायद ऐसा भारत में ही होता है। आपके पास यूरोप या चीन जैसी सुविधाएं नहीं हैं और आप बार-बार यह दुखड़ा रोते रहते हैं कि आपको गोल्ड नहीं मिलता। आपको यह समझना चाहिए कि अच्छे प्रदर्शन की सराहना होनी चाहिए। उसका अपना महत्व होता है। पदक नहीं आया तो बिंद्रा का प्रदर्शन शानदार था। बिंद्रा तीसरे स्थान के लिए हुए शूटऑफ में यूक्रेन के कुलिश से हार गए थे। हींज ने कहा कि कई बार आपका किस्मत भी साथ नहीं देती।