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ओलंपिक से कुश्ती को 'चित' करने की तैयारी

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 12 Feb 2013 11:55 PM IST
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ioc drops wrestling from 2020 olympics

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लंदन की खुशी को बीते अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ था कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ (आईओसी) ने भारतीयों की खुशी पर वज्रपात कर दिया। आईओसी ने कुश्ती को चारों खाने चित कर उसे 2020 ओलंपिक खेलों से बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी कर ली है।
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मंगलवार को स्विट्जरलैंड के लुसाने में आईओसी कार्यकारी बोर्ड की बैठक में यह सिफारिश की गई है। यह निर्णय इसलिए भी गले से नहीं उतर रहा है क्योंकि कुश्ती की तुलना में कम लोकप्रिय खेल मॉडर्न पैंटाथलान और ताइक्वांडो को ओलंपिक खेलों में बरकरार रखा गया है जबकि इन पर लंबे समय से तलवार लटकी हुई थी।


आईओसी प्रवक्ता मार्क एडम्स के मुताबिक फैसला वोटिंग के आधार पर हुआ है। अंतिम राउंड में फील्ड हॉकी, ताइक्वांडो, मॉडर्न पेंटाथनाल और कुश्ती बचे थे, जिसमें कुश्ती बाहर हुआ।

यह फैसला भारत के लिए खासतौर से निराशाजनक है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पहलवानों ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। लंदन ओलंपिक में तो हम एक रजत और एक कांस्य पदक जीतने में कामयाब भी रहे थे। कुश्ती न सिर्फ 1896 से ओलंपिक खेलों का हिस्सा है बल्कि कोर स्पोर्ट्स में भी शामिल है। आईओसी बोर्ड ने 26 खेलों की समीक्षा करने के बाद यह फैसला लिया है।

इसके तहत एक पुराने खेल को हटाकर एक नए खेल को शामिल किया जाना है। लंदन ओलंपिक में 18 स्वर्ण पदकों के लिए 344 पहलवानों ने हिस्सा लिया था। इससे पहले 2005 में आईओसी ने बेसबॉल और सॉफ्टबॉल को 2008 बीजिंग ओलंपिक से बाहर का रास्ता दिखाया था।

नए खेल को शामिल करने की योजना
आईओसी नए खेल को ओलंपिक कार्यक्रम में शामिल करना चाहती है। इसी वजह से ओलंपिक इतिहास के सबसे पुराने खेलों में से एक को हटाने पर फैसला लिया गया। प्रक्रिया के दौरान तीन दर्जन से भी ज्यादा कारणों की समीक्षा की गई, जिसमें टीवी रेटिंग, टिकट बिक्री, डोपिंग रोधी नीति, जनसंख्या और वैश्विक भागीदारी शामिल है।

मॉडर्न पैंटाथलान से हारी कुश्ती
माना जा रहा है कि 1912 में ओलंपिक में शामिल मॉडर्न पैंटाथलान पर तलवार लटकी हुई थी। लेकिन इस खेल के अंतरराष्ट्रीय महासंघ ने जबरदस्त लॉबिंग कर अपने ओलंपिक दर्जे को बचा लिया।

उम्मीदें अभी बाकी हैं
हालांकि अभी भी कुछ उम्मीदें बाकी हैं। 2020 के ओलंपिक गेम्स में जगह बनाने के लिए अब कुश्ती को बेसबॉल व सॉफ्टबॉल, कराटे, स्क्वैश, रोलर स्पोर्ट्स, स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग, वेक बोर्डिंग और वुशु समेत सात खेलों की चुनौती का सामना करना होगा।  

कब हो सकता है फैसला
इसी साल मई में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आईओसी कार्यकारी बोर्ड की बैठक होगी। इसके बाद सितंबर में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में होने वाली आम सभा में फैसले पर अंतिम मुहर लगेगी।

भविष्य अधर में
कुश्ती में भारत का भविष्य लगातार उज्ज्वल माना जा रहा है। निश्चित रूप से इस फैसले से भारत की पदक संख्या पर प्रभाव पड़ सकता है। युवा अमित कुमार और नरसिंह पंचम और महिला पहलवान गीता फोगट को भविष्य के विजेता के रूप में देखा जा रहा है।

बैडमिंटन पर भी लटकी थी तलवार
आईओसी की 26 खेलों की सूची में बैडमिंटन को भी शामिल किया गया था। मगर फिलहाल अगले दो ओलंपिक के लिए उसने अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया है।

कुश्ती में भारत ने जीते 4 पदक
--1952  में केडी जाधव ने कांस्य पदक जीता
--2008 में सुशील कुमार को मिला कांस्य
--2012 में सुशील ने रजत और योगेश्वर दत्त ने जीता कांस्य

1896 से है ओलंपिक का हिस्सा
1886 में आधुनिक ओलंपिक की शुरुआत से ही कुश्ती खेलों के इस महाकुंभ का हिस्सा रही है। सिर्फ वर्ष 1900 में ही कुश्ती को ओलंपिक कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया था।

‘मुझे अभी भी इस खबर पर विश्वास नहीं हो रहा है। मुझे ऐसा कोई कारण नहीं दिखता, जिस वजह से कुश्ती को ओलंपिक-2020 से बाहर किया जाए। यह खेल काफी पुराना और पूरी दुनिया में लोकप्रिय है।’--सुशील कुमार, दो बार के ओलंपिक पदक विजेता

‘उभरते पहलवानों के लिए यह बेहद बुरी खबर है। कुश्ती के जरिए भारत ने ओलंपिक में नई पहचान बनाई है और आईओसी इसे हटाना चाहती है। मेरे लिए यह बड़ा झटका है।’--योगेश्वर दत्त, लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता

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