आखिर अब कहां से आ गया है खिलाड़ियों में इतना आत्म-विश्वास?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यूरो टूर्नामेंट की आयोजक संस्था यूएफा इन खिलाड़ियों को दंडित करेगी, ऐसी संभावना नहीं है। जानकारों ने कहा है कि फुटबॉल खिलाड़ी दशकों से कॉरपोरेट स्पॉन्सर्स से घिरे रहे हैं। लेकिन अब वे इस नियंत्रण से बाहर आ रहे हैं...
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इस वक्त चल रहे यूरो फुटबॉल चैंपियनशिप टूर्नामेंट में एक खास रूझान देखने को मिला है। यह शायद पहला मौका है, जब खिलाड़ी बड़े प्रायोजकों की परवाह ना करते हुए बड़ी कंपनियों के प्रतीकों को ठेंगा दिखा रहे हैं। गौरतलब है कि हाल में हुए फ्रेंच ओपन टेनिस टूर्नामेंट के दौरान मशहूर महिला खिलाड़ी नाओमी ओसाका ने प्रेस कांफ्रेंस में भाग लेने से इनकार कर दिया था। टूर्नामेंट्स में प्रेस कांफ्रेंस प्रायोजक कंपनियों की बैनर की पृष्ठभूमि में होती है। हालांकि ओसाका ने अपनी मनोदशा ठीक ना होने की वजह बना कर प्रेस कांफ्रेंस में जाने से मना किया, लेकिन इस वजह से बने हालात के कारण उन्हें टूर्नामेंट बीच में ही छोड़ कर जाना पड़ा।
अब यूरो टूर्नामेंट के दौरान ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब खिलाड़ियों ने बड़े ब्रांड वाले ड्रिंक्स को अपने सामने से हटा दिया। ये तमाम घटनाएं बड़ी सुर्खियां बनीं हैं। सबसे ज्यादा चर्चित खबर पुर्तगाल के खिलाड़ी क्रिश्टियानो रोनाल्डो की रही। हंगरी से मैच से पहले हुई प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने अपने सामने रखी कोका कोला की बोतल को हटा दिया। गौरतलब है कि इसी बार रोनाल्डो यूरो टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कोका कोला की बोतल के प्रति अपमान का भाव दिखाते हुए उन्होंने पानी की बोतल लाने को कहा। गौरतलब है कि कोका कोला यूरो टूर्नामेंट की प्रायोजक कंपनी है।
इस टूर्नामेंट की एक और प्रयोजक गैर-अल्कोहलिक पेय बनाने वाली कंपनी हेइकेन है। फ्रांस के खिलाड़ी पॉल पोग्बा ने इस पेय की बोतल को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अपने सामने से हटा दिया। ऐसा करते हुए उनका वीडियो भी पूरी दुनिया में वायरल हो गया। उसके बाद बीते बुधवार को इटली के खिलाड़ी मैनुएल लोकातेली ने मैच के बाद की प्रेस कांफ्रेस में कोका कोला की बोतल सामने से हटाते हुए पानी की बोतल लाने की मांग की। स्विट्जलैंड के साथ उस मैच में इटली विजयी रहा था और उसमें दो गोल लोकातेली ने दागे थे। इसलिए जब उन्होंने ये कदम उठाया, दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों की निगाह उन पर थी।
बताया जाता है कि रोनाल्डो और लोकातेली ने स्वास्थ्य के लिए कोका कोला को खतरनाक मानते हुए ये कदम उठाया। जबकि पोग्बा मुस्लिम हैं, और उन्होंने हेइकेन पेय की बोतल इसलिए हटाई, क्योंकि वे उसके गैर-अल्कोहलिक होने को लेकर आश्वस्त नहीं थे। जानकारों का कहना है कि कारण चाहे कुछ भी हो, प्रायोजक कंपनियों के खिलाफ ऐसा साहस दिखाना असाधारण घटना है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि खिलाड़ियों के इस कदम से कंपनियों के बाजार मूल्य पर असर पड़ा है। टीवी चैनल यूरो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक रोनाल्डो के कदम के बाद कोका कोला को बाजार मूल्य के रूप में चार अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। हालांकि कोका कोला ने इस घटना को ज्यादा महत्व ना देते हुए एक बयान में सिर्फ यह कहा कि हर व्यक्ति को अपना पेय चुनने का अधिकार है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यूरो टूर्नामेंट की आयोजक संस्था यूएफा इन खिलाड़ियों को दंडित करेगी, ऐसी संभावना नहीं है। जानकारों ने कहा है कि फुटबॉल खिलाड़ी दशकों से कॉरपोरेट स्पॉन्सर्स से घिरे रहे हैं। लेकिन अब वे इस नियंत्रण से बाहर आ रहे हैं। सेंटर फॉर यूरेशियन स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में प्रोफेसर सिमोन चैडविक ने यूरो न्यूज से कहा कि ये माहौल फैलता जा रहा है। यह इस बात का संकेत है कि पेंडुलम अब स्पॉन्सर्स और व्यापारिक भागीदारों से हट कर फिर से खिलाड़ियों की तरफ झुक रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते महत्व की भी इस घटनाक्रम के पीछे भूमिका रही है। खिलाड़ियों की बीच बढ़ती चेतना और सोशल मीडिया के विकास से खिलाड़ियों का आत्म विश्वास बढ़ा है। इससे वे खुल कर बोलने लगे हैं। उनमें अब यह अहसास जाग गया है कि वे सिर्फ अपनी नुमाइंदगी ही नहीं करते। बल्कि अपने प्रशंसकों और उपभोक्ताओं के प्रति भी वे जवाबदेह हैं।