प्यार ने जापानी फुटबालर को बनाया भारतीय
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अराता ने फिजियोथेरेपिस्ट श्वेता मानेरिकर से न सिर्फ प्रेम विवाह किया बल्कि उन्होंने नाम भी भारतीय रख लिया है 'नीलकंठ खांभोलजा'। डच कोच विम कोवरमांस की सलाह पर 30 वर्षीय अराता को फिलिस्तीन के खिलाफ छह फरवरी को कोच्चि में होने वाले दोस्ताना मैच के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। अराता बेहद खुश हैं।
उन्होंने अपनी यह खुशी ‘अमर उजाला’ से साझा करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय नागरिक बनने के लिए बेहद संघर्ष किया है। यह उनकी पत्नी और दोस्तों की मेहनत का नतीजा है जो उन्हें तीन माह पूर्व भारतीय पासपोर्ट हासिल हुआ। हालांकि अराता भारतीय टीम के लिए पहले भी खेल सकते थे। लेकिन खेल मंत्रालय के भारतीय पासपोर्ट रखने के नियम ने उन्हें इससे दूर कर रखा था। श्वेता से विवाह के बाद यह रास्ता आसान हुआ। अब वह मराठी सीखने की कोशिश कर रहे हैं।
भाई से ली प्रेरणा
जापानी मां से जन्मे अराता पिता से अलग होने के बाद जापान में ही पले बढ़े। अपने बड़े भाई से प्रेरणा लेकर उन्होंने नौ साल की उम्र में फुटबाल खेलना शुरू किया।जापान और सिंगापुर के क्लबों में खेलने के बाद 2006 में ईस्ट बंगाल के लिए खेलने भारत आए। पिछले कुछ सालों से पुणे एफसी से जुड़े हैं। यहीं उन्हें श्वेता मिलीं।