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फीफा वर्ल्ड कप में भी फिक्स हो सकते हैं फुटबॉल मैच!
एड हॉकिंस/बेटिंग एक्सपर्ट
Updated Sat, 14 Jun 2014 04:22 PM IST
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ब्राजील में फुटबॉल वर्ल्ड कप शुरू हो चुका है। ऐसे में यह दावा सामने आना कि स्कॉटलैंड और नाइजीरिया के बीच हुए वार्म-अप मैच को फिक्स करने की कोशिश की गई थी, कान खड़े कर देता है।
क्रिकेट पर तो आए दिन फिक्सिंग का साया पड़ता रहा है और इससे खेल और खिलाड़ियों की काफी किरकिरी भी हुई है। लेकिन फुटबॉल के लिए यह खबर आम नहीं है और विश्व कप जैसे महा आयोजन में फिक्सिंग होना खेल प्रेमियों के पूरे विश्वास को हिला सकता है।
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हालांकि दुनियाभर के फुटबॉल प्रेमी और विशेषज्ञों का मानना है कि ब्राजील में होने वाले फुटबॉल वर्ल्ड कप से सटोरिए दूर ही रहेंगे लेकिन फीफा के सुरक्षा प्रमुख राल्फ माचके की राय ऐसी नहीं है।
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कौन कर सकता है 'फिक्सिंग'?
फीफा के सुरक्षा प्रमुख ने बताया कि वह और खेल में भ्रष्टाचार रोकने के लिए उनकी पूरी टीम ब्राजील में होने वाले वर्ल्ड कप पर नजर रखे हुए है। राल्फ के अनुसार सट्टेबाजी को रोकने के लिए वह कुछ खास बिंदुओं पर ध्यान दे रहे हैं।
1, ऐसी टीमों को चिन्हित किया गया हैस जिनसे सटोरिए संपर्क कर सकते हैं या पहले संपर्क किया है।
2, ग्रुप स्टेज के आखिरी मैच जिनमें ऐसी टीमें खेलेंगी जो प्रतियोगिता से बाहर हो चुकी हैं, सटोरिए उन मैचों को अपना निशाना बना सकते हैं।
3, मुख्य प्रतियोगिता से पहले होने वाले वार्म अप मुकाबलों में भी सटोरिये सक्रिय हो सकते हैं।
4, कई खिलाड़ियों व मैदान में मौजूद रहने वाले रेफरियों से सट्टेबाज़ों के संपर्क करने की खबरे आई हैं और फीफा का सुरक्षा दल उन पर नजर रखे हुए है।
हालांकि राल्फ ने ऐसे किसी भी खिलाड़ी, टीम या रेफरी का नाम बताने से इनकार कर दिया जिनसे सट्टेबाजों के संपर्क करने की खबर मिली है लेकिन उन्होंने यह साफ किया कि उनकी लिस्ट में इंग्लैंड की टीम हाई रिस्क पर नहीं है।
कैसे होती है फिक्सिंग
क्रिकेट में तो कोई खिलाड़ी कितने रन बनाएगा या किस बॉल पर बांउड्री लगेगी या विकेट गिरेगा, इस पर 'स्पॉट फिक्सिंग' होती है या फिर पूरे मैच के नतीजे पर फिक्सिंग होती है लेकिन फुटबॉल में सट्टेबाजी कुछ अलग तरह से की जाती है।
पहला तरीका 'एशियन हैंडिकैप' कहलाता है जिसमें किसी टीम की वर्तमान फॉर्म के अनुसार टीम पर दांव लगाए जाते हैं। टीम अपनी फॉर्म के अनुसार प्रदर्शन करती है तो सट्टेबाज को फायदा मिलता है।
दूसरा तरीका 'ओवर-अंडर' कहलाता है जिसमें सिर्फ गोल के अंतर पर शर्त लगाई जाती है।
राल्फ ने बताया, "ओवर-अंडर के लिए सटोरियों को पूरी टीम को खरीदना पड़ता है, ऐसे में ये उतना खतरनाक नहीं है। लेकिन एशियन हैंडिकैप में रेफ़री को ख़रीदा जा सकता है और इसे पता करना भी मुश्किल है।"
हालांकि फीफा की सुरक्षा समिति सभी टीमों और खिलाड़ियों से मुलाकात कर रही है लेकिन जितना बड़ा आयोजन होता है खतरा भी उतना बड़ा हो जाता है क्योंकि खिलाड़ी भी ज्यादा हो जाते हैं। वैसे सुरक्षा एंजेसियों के अनुसार इस साल वर्ल्ड कप पर 85 अरब का दांव लग सकता है।