'सपना ओलंपिक के लिए महज क्वॉलिफाई करना नहीं बल्कि पदक जीतना'
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ओलंपिक रजत पदक विजेता पीवी सिंधु और सिकी रेड्डी ने हैदराबाद में भारत के नंबर एक उस्ताद पुलेला गोपीचंद की शागिर्दी में करीब 14 बरस की उम्र में साथ साथ ही बैडमिंटन की बारीकियां सीखीं। सिकी और पी वी सिंधु ने साथ- साथ सिंगल्स ही नहीं डबल्स में साथ साथ खेलीं। सिकी रेड्डी ने 'अमर उजाला' से खुलासा किया, 'घुटने की चोट के चलते मुझे सिंगल्स छोडना पड़ा। मैं सिंधु और अपने से सीनियर साइना नेहवाल के खिलाफ सिंगल्स में खूब खेलीं। सिंधु सिंगल्स में बहुत आगे निकल गई। मैं खुश हूं कि गोपीचंद अकैडमी की मेरी साथी सिंधु और साइना नेहवाल आज दुनिया की शीर्ष सिंगल्स खिलाडिय़ों में हैं। इन दोनों के साथ गोपी सर की गोपीचंद अकैडमी में खेलने से अपना खेल बेहतर करने में मदद मिली।'
उन्होंने आगे कहा, '2009 में चोट के चलते मैंने सिंगल्स की बजाय महिला डबल्स और मिक्स्ड डबल्स पर अपना ध्यान लगाना ज्यादा मुनासिब समझा। मुझे खुशी है कि मैं डबल्स में भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन कर एक अलग मुकाम हासिल करने में कामयाब रहीं। मैं गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में महिला डबल्स में कांसा और मिक्स्ड टीम स्पद्र्धा में स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रही। जब साइना दुनिया की नंबर 8 खिलाड़ी थी तब उनसे फाइनल में हारने के बावजूद मैंने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी।'
वह बताती हैं, 'मेरा अब पहला लक्ष्य है जकार्ता में एशियाई खेलों में डबल्स स्पद्र्धाओं में खिताब जीतना है। मैं आज जो कुछ भी हूं कि गोपी सर के बतौर बैडमिंटन उस्ताद मिले मार्गदर्शन की बदौलत हूं। मैं इनमें दुनिया की बड़ी बैडमिंटन ताकत के रूप में चीन की मौजूदगी से वाकिफ हूं। मैं अब मानती हूं कि चीनी अजेय नहीं हैं। हम भारतीय खिलाड़ी उन्हें हरा रही हैं। दिन हमारा रहा और कुछ तकदीर भी साथ रही तो हम चीनी खिलाडिय़ों को हरा कर जकार्ता एशियाई खेलों में पदक जीतने का दम रखती हूं। हमें एशियाई खेलों से पहले 30 जुलाई से 5 अगस्त तक नानजिंग(चीन) में बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में शिरकत करनी है। इससे हमें खुद को जकार्ता में इसके करीब एक पखवाड़े यानी 18 अगस्त से शुरू होने वाले एशियाई खेलों के लिए तैयार करने का अच्छा मौका मिलेगा। इसमें महिला और मिक्स्ड डबल्स में खिताब जीत कर मैं टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करना चाहती हूं। मेरा सपना 2020 के टोक्यो ओलंपिक में डबल्स स्पद्र्धाओं के लिए क्वॉलिफाई कर इसमें महज शिरकत करना ही नहीं है। मैं टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने के साथ डबल्स में पदक जीतना चाहती हूं।'
उनका कहना है, 'भारत के बैडमिंटन खिलाडिय़ों को सिंगल्स में पदक जीतने पर तवज्जो और सुविधाएं मिलने से कोई ज्यादा शिकायत नहीं है। मैं बस यह चाहती हूं कि भारत में डबल्स खिलाडिय़ों को उनकी कामयाबी पर वैसी ही सुविधाएं मिलें, जो कि देश की शीर्ष सिंगल्स खिलाडिय़ों को मिलती हैं। सिंगल्स खिलाडिय़ों के लिए जिस तरह बड़े प्रायोजक सामने आते हैं मैं चाहती हूं कि उसी तरह देश की डबल्स बैडमिंटन खिलाडिय़ों और उनकी जोडिय़ों का आगे आकर सहयोग करें। महिला डबल्स में मेरी और अश्विनी पोनप्पा तथा मिक्स्ड डबल्स में जेरी प्रणव चोपड़ा और मेरी जोड़ी भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन कर रही है। सबसे अच्छी बात यह है मेरी इन दोनों के साथ डबल्स में जोड़ी जम रही है। हमारी गोपीचंद अकैडमी से ही साइना, सिंधु, श्रीकांत और परुपल्ली कश्यप सहित एक से एक बेहतरीन खिलाड़ी बराबर निकल रहे हैं। लोग इसीलिए गोपीचंद बैडमिंटन अकैडमी को 'गोपीचंद बैडमिंटन फैक्ट्री' कहते हैं।’