सिंधु, साइना समेत टॉप शटलरों के लिए हर हाल में चाहिए है विदेशी कोच
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पीवी सिंधु, साइना नेहवाल, किदांबी श्रीकांत, एचएस प्रणय, समीर वर्मा, बी साई परणीत की टोकियो ओलंपिक की तैयारियों के लिए नए विदेशी कोच की तलाश अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इन नामी शटलरों की तैयारियों के लिए बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने चीफ कोच गोपीचंद का भार हल्का करने को तीन विदेशी कोच से बात चलाई, लेकिन अनुबंध की प्रक्रियाओं में हुई देरी के चलते इन तीनों ही कोच ने दूसरे देशों का दामन थाम लिया। अब साई और बीएआई ने मिलकर कोरियाई राष्ट्रीय टीम की कोच और अपने जमाने की दिग्गज शटलर रहीं किम जी ह्यून पर दांव लगाया है।
हिरोशिमा एशियाई खेलों में टीम गोल्ड जीतने वाली किम सिंगल्स कोच के लिए भारतीय टीम से जुडने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने 10 हजार अमेरिकी डॉलर प्रति माह की मांग रखी है। आज तक किसी भी बैडमिंटन के विदेशी कोच को इतनी भारी भरकम राशि नहीं दी गई है, लेकिन बीएआई ने उन्हें आठ हजार डॉलर में आने के लिए मना लिया है, लेकिन बीएआई को डर है कि किम से अनुबंध करने की प्रक्रिया में देरी की गई तो वह भी हाथ से निकल जाएंगी। अगर किम से अनुबंध सिरे नहीं चढ़ा तो टोकियो में भारत की बैडमिंटन में उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है।
गोपी अकादमी में बचे हैं सिर्फ दो विदेशी कोच
तौफीक हिदायत के कोच मुलयो हांदोयो के जाने के बाद हाल ही में मलेशियन कोच शंकर अन्नामलाई भी भारतीय टीम का साथ छोड़कर जा चुकेहैं। इस वक्त सिंगल्स कोच के रूप में ड्वी क्रिस्टियावन और डबल्स कोच किम तान हर ही बचे हैं। सभी टॉप शटलरों पर गोपी एक साथ ध्यान नहीं दे सकते हैं। बीते वर्ष पुरुष शटलरों के प्रदर्शन में आई गिरावट का बड़ा कारण मुलयो का नहीं होना था। यही कारण है कि बीएआई हर हालत में अच्छा विदेशी कोच चाहती है।
1989 में जूनियर वल्र्ड चैंपियन रहीं किम को साई छह हजार डॉलर में लाना चाहती है, लेकिन बीएआई ने साफ कर दिया है कि वह आठ हजार से कम की राशि में नहीं आएंगी। इससे पहले बीएआई ने साई को हादी सुगियांतो, नामरीह सुरोतो और सांतोसो का नाम भेजा था, लेकिन प्रक्रिया पूरी करने के चक्कर में हुई देरी से तीनों ही कोचेज ने दूसरे देशों का हाथ थाम लिया।