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सिंधु इतिहास रचने और भारत की महान खिलाड़ी बनने से मात्र एक कदम दूर

Sat, 24 Aug 2019 05:39 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: Rajeev Rai Updated Sat, 24 Aug 2019 05:39 PM IST
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PV Sindhu one step away to create history in indian badminton enters final in bwf world championship
pv sindhu

भारतीय स्टार पीवी सिंधु ने शनिवार को यहां ऑल इंग्लैंड चैंपियन चेन यु फेई पर सीधे गेम में मिली जीत से लगातार तीसरे फाइनल में प्रवेश किया जिससे वह विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीतने से महज एक कदम दूर हैं।

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सिंधु ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के पिछले दो चरण में लगातार रजत पदक हासिल किए, इसके अलावा उनके नाम दो कांस्य पदक भी हैं। हैदराबादी खिलाड़ी ने 40 मिनट तक चले सेमीफाइनल में चीन की दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी चेन यु फेई को 21-7 21-14 से शिकस्त दी। चौबीस साल की भारतीय खिलाड़ी अब रविवार को थाईलैंड की 2013 की विश्व चैंपियन रतचानोक इंतानोन और जापान की 2017 की विजेता नोजोमी ओकुहारा के बीच होने वाले मुकाबले की विजेता से भिड़ेंगी। ओलंपिक रजत पदकधारी सिंधु का मैच से पहले चेन के खिलाफ रिकॉर्ड 5-3 का था। उन्होंने शुरू में तेजी से बढ़त बनाई।
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सिंधु ने तेज तर्रार शॉट से कमजोर रिटर्न का फायदा उठाया और अपनी प्रतिद्वंद्वी को पस्त किया। पहले ब्रेक में सिंधु ने 11-3 की बढ़त बनाई हुई थी। चेन का मुश्किल का दौर जारी रहा और वह लाइन से चूकती रही जिससे भारतीय खिलाड़ी ने मनमुताबिक अंक हासिल किए। इस तरह पहला गेम आसानी से जीत लिया। दूसरे गेम में चेन ने हालांकि बेहतर शुरुआत की और दोनों खिलाड़ी 3-3 की बराबरी पर थी। लेकिन चीनी खिलाड़ी की गलतियां जारी रहीं जिससे सिंधु ने बढ़त 10-6 कर ली।
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सिंधु ने चेन के बैकहैंड की कमजोरी का फायदा उठाया और ब्रेक तक 11-7 से आगे हो ली। भारतीय खिलाड़ी ने रैलियों के दौरान प्रतिद्वंद्वी को जरा भी मौका नहीं दिया और इन प्रयासों का उसे फल मिला। चेन ने कई बेजा गलतियां की और सिंधु ने जल्द ही बढ़त 17-9 कर ली और इसे भी जीत लिया। 

कब-कब जीते हैं विश्व चैंपियनशिप में पदक 

2018 नानजिंग    रजत पदक
2017  ग्लासगो     रजत पदक
2014 कोपेनहेगन    कांस्य पदक 
2013  ग्वांगझू     कांस्य पदक

 
मैंने शुरुआत से ही बढ़त बना ली थी और इसे बेहतरीन ढंग से अंजाम दिया। दूसरे गेम में हालांकि मैंने कुछ गलतियां की लेकिन दोबारा बढ़त बनाने से फिर विश्वास बढ़ा। मैच अच्छा रहा। उम्मीद है कि फाइनल में भी ऐसा ही होगा।-पीवी सिंधु 

 

36 साल बाद प्रणीत के पदक का प्रकाश 

बी साई प्रणीत का बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में स्वप्निल सफर समाप्त हो गया और उन्हें शनिवार को एक तरफा सेमीफाइनल में गत चैंपियन केंतो मोमोता से हारकर कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। प्रणीत का आक्रामक खेल फार्म में चल रहे मोमोता के डिफेंस के सामने नहीं टिक सका और 41 मिनट तक चले मुकाबले में वह जापान के नंबर एक खिलाड़ी से 13-21 8-21 से हार गए। इस हार के बावजूद प्रणीत ने शानदार उपलब्धि अपने नाम की।

वह 36 साल में इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए। प्रकाश पादुकोण ने 1983 चरण में विश्व चैंपियनशिप के पुरुष एकल में कांस्य पदक हासिल किया था।  प्रणीत ने हालांकि अच्छी शुरुआत कर 5-3 की बढ़त बनाई। लेकिन मोमोता ने ब्रेक तक इसे 11-10 कर दिया। जल्द ही चार अंक जुटाकर 15-10 से आगे हो गए।

प्रणीत ने इसके बाद कई बेजा गलतियां की जिससे मोमोता ने अंतर 18-12 कर दिया। प्रणीत की गलती से जापानी खिलाड़ी ने पहला गेम अपने नाम किया। दूसरे गेम में दोनों 2-2 की बराबरी पर थे लेकिन भारतीय खिलाड़ी मोमोता के तेज तर्रार शॉट का जवाब नहीं दे सका और 2-9 से पीछे हो गया। ब्रेक तक मोमोता 11-3 से आगे थे। उन्होंने जल्द ही इसे 15-5 कर दिया। प्रणीत के बैकहैंड से मोमोता ने 19-8 बढ़त बना ली और जल्द ही जीत हासिल की।

1983 : में प्रकाश पादुकोण ने जीता था पदक, उसके बाद प्रणीत ने सफलता हासिल की है 

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