सिंधू के पास 36 साल बाद इतिहास रचने का मौका, किदांबी श्रीकांत से भी देश को सुनहरे तमगे की उम्मीद
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शानदार फॉर्म में चल रहे किदांबी श्रीकांत और पीवी सिंधू 18वें एशियाई खेलों में रविवार से शुरू हो रही बैडमिंटन स्पर्धा में भारतीय चुनौती की अगुवाई करेंगे, जिसमें उनकी कोशिश पहला स्थान हासिल करने पर लगी होंगी। रविवार से बैडमिंटन की टीम स्पर्धाएं शुरू हो रही हैं। भारत ने 2014 में इंचियोन में हुए पिछले एशियाई खेलों में साइना नेहवाल और सिधू के नेतृत्व में कांस्य पदक जीत कर 28 साल का पदकों का सूखा खत्म किया था।
इससे पहले 1986 में प्रकाश पादुकोण और विमल कुमार की पुरुष टीम ने कांस्य पदक हासिल किया था। एशियाई खेलों में बैडमिंटन में भारत ने अब तक कुल आठ पदक हासिल किए हैं जिसमें सैयद मोदी इकलौते ऐसे खिलाड़ी है जिन्होंने 1982 में एकल स्पर्धा में पदक हासिल किया है।
सिंधू 23 अगस्त से शुरू हो रही एकल स्पर्धा में इस इंतजार को खत्म करना चाहेंगी। सिंधू एंड कंपनी की अगुवाई में भारतीय टीम पिछले आयोजन में जीते कांस्य पदक के रंग को बदलना चाहेगी। पहले दौर में बाई मिलने के बाद टीम रविवार को क्वार्टर फाइनल में जापान के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी।
इस साल उबेर कप का खिताब जीतने वाले जापान की टीम में शीर्ष एकल खिलाड़ी है जिसमें 2017 विश्व चैंपियन नोजोमी ओकुहारा और विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर काबिज अकाने यामागुची के अलावा युगल रैंकिंग में नंबर एक और नंबर दो पर काबिज क्रमश: युकी फुकुशिमा एवं सायका हिरोता तथा मिसाकी मातसुतोमा एवं अयाका ताकाहाशी की जोड़ियां भी हैं।
सिंधू ने हालांकि पिछले महीने विश्व चैंपियनशिप में फाइनल में पहुंचने के क्रम में नोजोमी और यामागुची को मात दी थी। इस भारतीय खिलाड़ी को टीम और एकल स्पर्धा में देश को स्वर्ण पदक सुनिश्चित करने केलिए एक बार फिर जापान के इन खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन करना होगा। टीम स्पर्धा का नतीजा युगल विशेषज्ञ अश्विनी पोनप्पा और एन सिक्की रेड्डी के प्रदर्शन पर भी निर्भर करेगा क्योंकि दोनों को अपने से बेहतर रैंकिंग वाले खिलाड़ियों से भिड़ना होगा।
पुरुष टीम का अभियान भी रविवार से शुरू होगा जिसमें वह कमजोर माने जाने वाले मालदीव के खिलाफ खेलेंगे। भारतीय टीम अगर इस मैच को जीतने में सफल रही तो क्वार्टर फाइनल में उनका सपना मेजबान इंडोनेशिया से होगा जिसे पहले दौर में बाई मिली है। श्रीकांत और एचएस प्रणय की अगुवाई में भारतीय टीम के पास 32 वर्षों के पदक का सूखा खत्म करने का सुनहरा मौका होगा।
श्रीकांत और प्रणय ने पहले भी अपने प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को धूल चटाई है और अगर राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक विजेता चिराग शेट्टी और सात्विक रेंकीरेड्डी अपने प्रदर्शन को दोहरा सकेतो पदक की संभावना है।
एकल वर्ग के मुकाबले 22 अगस्त से शुरू होंगे जिसमें श्रीकांत और प्रणय से भारत को सबसे ज्यादा उम्मीदें होगी। भारतीय कोच पुलेला गोपीचंद को उम्मीद है कि एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ी इतिहास रचेंगे लेकिन उन्होंने विश्व चैंपियनशिप के तुरंत बाद इसके आयोजन पर खिलाड़ियों की चोट को लेकर चिंता भी जताई।
नागल के साथ युगल में उतरेंगे रामकुमार
रामकुमार रामनाथन और सुमित नागल के अलावा रोहन बोपन्ना और दिविज शरण की जोड़ी पुरुष युगल मुकाबले में कोर्ट पर उतरेगी। युगल के साथ ही रामकुमार रामनाथन एकल प्रतिस्पर्धा में भी हिस्सा लेंगे। चार साल पहले एशियाई खेल में भारत टेनिस में कुल पांच पदक जीतने में कामयाब हुआ था। इनमें मिश्रित युगल में गोल्ड भी शामिल था।