पिता और भाई को खेलते देख शटलर बने लक्ष्य, अब विदेशी जमीं पर रच डाला इतिहास
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पूर्व जूनियर वर्ल्ड नंबर वन अल्मोड़ा के लक्ष्य सेन जूनियर एशियाई चैंपियन बन गए हैं। यह कारनामा करने वाले वह तीसरे भारतीय हैं। उन्होंने रविवार को जकार्ता में खेले गए बैडमिंटन जूनियर एशिया चैंपियनशिप के फाइनल में थाईलैंड के जूनियर वर्ल्ड नंबर एक कुनलावुत वितिदसार्न को सीधे गेमों में 21-19, 21-18 से हराकर यह उपलब्धि हासिल की।
बता दें कि 53 साल बाद किसी पुरुष भारतीय शटलर ने यह खिताब जीता है। उनसे पहले 1965 में गौतम ठक्कर जूनियर एशियाई चैंपियन बने थे, जबकि महिलाओं में यह खिताब वर्ष 2012 में पीवी सिंधू जीत चुकी हैं। प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में दिग्गज प्रकाश और विमल कुमार के संरक्षण में ट्रेनिंग करने वाले लक्ष्य को यहां छठी वरीयता मिली थी।
सेमीफाइनल में उन्होंने लोकल फेवरेट और खिताब के दावेदार इली रुमबे को 21-7, 21-14 से हराया था। लक्ष्य इसके साथ बड़े दिग्गजों की श्रेणी में आ खड़े हुए हैं। 1997 में तौफीक हिदायत, 2000 में लिन दान और 2007 में चेन लांग यह खिताब जीत चुके हैं।
पिता और भाई को खेलते देख शटलर बने लक्ष्य
17 साल के लक्ष्य पांच साल की उम्र से बैडमिंटन खेल रहे हैं। सच्चाई यह है कि जब से उन्होंने होश संभाला बैडमिंटन को अपने आसपास पाया। उनके पिता डीके सेन बैडमिंटन के साई कोच हैं, जबकि भाई चिराग सेन भी बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। यही नहीं उनके दादा नामी बैडमिंटन खिलाड़ी थे। बैडमिंटन की शिक्षा-दीक्षा उन्होंने अपने पिता से ही अल्मोड़ा में ली, इसके बाद उन पर नजर प्रकाश पादुकोण पर पड़ी, पिछले सात-आठ सालों से वह बंगलूरू में प्रकाश अकादमी में ही प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं।
जीत से बढ़ेगा हौसला
मैं इस टूर्नामेंट को जीतकर खुश हूं। इससे मेरा हौसला बढ़ेगा। मैं टीम और व्यक्तिगत मुकाबलों में खेला, इस लिए यह मेरे लिए लंबा टूर्नामेंट था। मुझे खुशी है कि मैं अच्छा खेल सका और जीता। मैं पहले भी इन खिलाड़ियों के साथ खेल चुका हूं और उनका खेल अच्छी तरह जानता था।