क्या आप जानते हैं आपका शरीर आपकी आत्मा का बच्चा है?

Rakesh Jhaराकेश कुमार झा Updated Thu, 21 Aug 2014 02:13 PM IST
विज्ञापन
yog guru iyenger book on yoga

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
ज्यादातर लोग यही चाहते हैं कि उनका शरीर उन्हें कोई तकलीफ न दे। अगर उन्हें कोई रोग या कष्ट न हो, तो वे स्वयं को स्वस्थ समझते हैं। वे इस बात से अनजान रहते हैं कि शरीर और मस्तिष्क के बीच का असंतुलन अंततः उन्हें बीमार बना देगा। योग का स्वास्थ्य पर तीन गुना असर होता है। यह लोगों को स्वस्थ रखता है, रोगों को पनपने नहीं देता और बीमार व्यक्तियों को स्वस्थ बनाता है।
विज्ञापन

लेकिन बीमारियां केवल शारीरिक नहीं होतीं। हर वह चीज, जो आपके आध्यात्मिक जीवन और व्यवहार को अव्यवस्थित करता है, बीमारी है। भले ही वह तत्काल बीमारी न लगे, पर अंततः वह बीमारी के रूप में ही प्रकट होगा। चूंकि ज्यादातर आधुनिक लोगों ने अपने मस्तिष्क को अपने शरीर से अलग मान लिया है, इसलिए उनकी आत्मा उनके सामान्य जीवन से निर्वासित हो गई है। वे भूल जाते हैं कि शरीर, मन और आत्मा, तीनों की तंदुरुस्ती हमारी मांसपेशियों के तंतुओं की तरह आपस में घनिष्ठता से जुड़ी होती हैं।
विज्ञापन
आगे पढ़ें

आत्मा का बच्चा शरीर

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X