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मन में उठने वाले अजब गजब विचारों का कारण

Tue, 24 Mar 2015 08:25 AM IST
Updated Tue, 24 Mar 2015 08:25 AM IST
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why thought comes in mind

मन में कोई विचार यूं ही नहीं आ जाता। जो भी विचार आता है, वह कितना ही ऊलजलूल हो वाकई उसका वजूद रहता है। वह अजूबा इसलिए लगता है कि हमारी स्मृति में वह संचित विचारों से मेल नहीं खाता। क्वांटम भौतिकी की नवीनतम जानकारियों का हवाला देते हुए डोरा कोहेन ने हाल ही में कोरनेल यूनिवर्सिटी न्यूयार्क मे एक व्याख्यान दिया।

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क्वांटम भौतिकी की संभावनाओँ के बारे में उन्होंने कहा कि अगर आपके मन में इंसान की तरह बोलते बतियाते चूहे का विचार आता है तो यकीन मानिए वैसा कहीं न कहीं होगा। दुनिया बहुत बड़ी है। अभी हम उसी के बारे में ठीक से नहीं जान पाए।
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दिखाई या महसूस होने वाली दुनिया की तरह अरबों खरबों गुना विस्तार वाले ब्रह्मांड के बारे में पता लगना या जानना तो और भी मुश्किल है। लेकिन दुनिया में नया कुछ नहीं हो रहा। जो हो रहा है वह इसी मायने में नया है कि हम उसे याद नहीं कर पा रहे।

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आइंस्टीन ने बताया है यूं आते हैं मन में विचार

why thought comes in mind

1935 में आंइस्टीन ने क्वांटम सिद्धांत के बारे में कहा था कि एक ही तरह के दो कण यदि लाखों करोड़ों मील दूर हों तो भी एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। करोड़ों मील दूर होते हुए भी दोनों कणों में एक साथ एक ही समय प्रतिक्रिया होगी। इसे यों भी समझ सकते हैं कि एक ही मां से जन्मे दो संतांनों मे कोई एक किसी तकलीफ से गुजरती है तो दूसरी संतान भी अकारण व्यथित हो उठती है।

इस बात का पता लगे अस्सी वर्ष से भी ज्यादा समय हो गया। क्वांटम सिद्धांत के बारे में उसके बाद जानकारी का कई गुना इजाफा हुआ। डोरा कोहेन ने अपने शोध निंबध में कहा कि क्वांटम अब अध्यात्म के करीब पहुंच गया, पहुंच क्या गया, करीब तो वह पहले ही था। उसके बारे में पता पिछली शताब्दी में ही चला।

इस सिद्धांत और प्रकिया के प्रयोग की दिशा यह है कि दुनिया तात्विक रूप से एक होती चली जाएगी। फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी बर्नार्ड द इस्पाना के मुताबिक पार्थिव दृष्टि से दूर होते हुए भी दो कण यदि एक ही तरीके से काम करते हैं तो यह भी संभव है कि मेज पर मौजूद चीज को देख कर किसी उपकरण का सहारा लिए बिना ही सके व्यवहार के बारे में बताया जा सके। हजारों लाखों मील दूर की खबर यहां मौजूद कण पर निगरानी रख कर बताई जा सकती है।

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