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अगर आप भी खतरों से नहीं डरते हैं तो इसका कारण जान लीजिए
ज्योतिर्मय/अमर उजाला
Updated Fri, 28 Nov 2014 08:05 AM IST
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जोखिम उठाते समय लोगों का व्यवहार कैसा और कितना अलग होता है? यह उस वक्त व्यक्ति के भीतर मौजूद आध्यात्मिक वृत्ति की प्रधानता पर निर्भर करती है या कोई और ही कारण हैं? कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका कारण जीन्स हैं। जीन्स जो कोड बनाते हैं, वे अक्सर उतने ही भिन्न होते हैं कि पूरा व्यवहार ही बदल जाता है।
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कुछ लोगों में खुशी हासिल करने की इच्छा बाकियों से ज्यादा होती है। मानव विकास के आधुनिक मॉडल इस धारणा पर विचार करते है और कहते हैं कि यही बात इंसान के अभी तक बचे रहने की वजह है। एक समूह में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो जोखिम उठाने के लिए तैयार हों।
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लेकिन इस खतरे के पुरस्कार खूब सारे हो सकते हैं। जोखिम उठाने वालों को चोट लगने का खतरा रहता है लेकिन कामयाब होने पर वे समाज की बहुत महत्वपूर्ण सेवा करते हैं। स्वामी वेद भारती के अनुसार जोखिम उठाने की वृत्ति आध्यात्मिक है। किसी भी दुनियावी उपलब्धि की तुलना में आध्यात्मिक तलाश ज्यादा जोखिम भरी है।
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अधिकतर लोग अपने दिमाग में जोखिम की लागत व लाभ की गणना कर लेते हैं। यह सोचते हैं कि फायदे क्या संभावित लागत से अधिक होंगे और अधिक होंगे तो कितने। लेकिन अध्यात्म में इस तरह के लाभ और लागता की कोई तुलना नहीं है।