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तब आप बिना खाना खाए भी स्वस्थ और ताकतवर बने रहेंगे

Mon, 02 Jun 2014 11:08 AM IST
Updated Mon, 02 Jun 2014 11:08 AM IST
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when food is not necessary for our body

कभी गौर किया है कि जब कोई व्यक्ति लंबी या गंभीर बीमारी के ठीक होने पर बिस्तर से उठने की कोशिश करता हैं तो कैसे चलता हैं?  तब वह आहिस्ता आहिस्ता चलता है जैसे फूंक-फूंककर कदम रख रहा हो।

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लगता तो यही है कि वह कमजोरी के कारण उस तरह चलता है, पर योग विद्या के जानकार बताते हैं कि ऐसा नहीं है। योगी स्वात्मा राम के अनुसार बीमारी के बाद शरीर हल्का हो जाता है।
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जिसे हम स्वास्थ्य बोना कहते हैं, वह प्रक्रिया शुरु होने के बाद शरीर के साथ जीवन व्यवहार की अन्य गतिविधियों के प्रति भी सजगता बढ़ती है। और वयक्ति सभी काम होशपूर्वक करता है। क्योंकि यब प्रक्रिया अपने आप शुरु होती है, इसलिए अटपटी लगती है। पर मनुष्य के मूल स्वभाव के अनुरूप है।

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जब कुछ भी खाने का मन नहीं होता

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योगी स्वात्मा राम के लिखे हठयोग प्रदीपिका ग्रंथ के सूत्रों पर अनुसंधान कर रहे डा. हरींद्र नाथ मुखर्जी का कहना है कि पांच से सात सप्ताह का शरीर का एक प्राकृतिक चक्र होता है। दिनों में हिसाब लगाएं तो 40 से 48 दिनों में शरीर एक खास चक्र से गुजरता है। ज्यादातर अनुष्ठान और विशिष्ट साधनाएं इसा अवधि में होती है। इस अवधि में चार से पांच बार ऐसा दौर जरूर आता है जब कुछ भी खाने का मन नहीं होता।

उस दिन आपको नहीं खाना चाहिए। पाएंगे कि इस अवधि में किसी एक दिन शरीर को भोजन की जरूरत नहीं होती। शरीर के प्रति सजग होने का अभ्यास किया जाए तो अहसास होगा कि इन दिनों में किसी भी एक दिन बिना भोजन के आराम से रह सकते हैं। नैसर्गिक रूप से शरीर के निराहार रहने की इस जरूरत का पता लगा लिया जाए तो शरीर बीमार कम ही पड़ेगा।

मोटापे से बचने के लिए दिन में बस दो बार करें यह काम

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डा. एचएन मुखर्जी ने शरीर के इस स्वभाव को प्रयोगों के आधार पर भी प्रमाणित किया है। कुछ प्रयोग तो इतने आसान है कि कोई भी कर सकता है। एक प्रयोग को समझाते हुए उन्होंने लिखा है कि मान लीजिए कि आप एक खास मात्रा में भोजन करते हैं।

इस मात्रा को दो हिस्सों में बांट लें और दिन में दो बार इसे खाएं। दो बार किए जा रहे इस भोजन का प्रभाव उसी भोजन को चार या पांच बार करने वाले व्यक्ति पर अलग तरह का होता है।

वह मोटा होता जाएगा। चार पांच बार खाने वाले ने भी उतना ही खाया, जितनी दो बार खाने वाले ने। फिर ज्यादा बार खाने वाले का वजन क्यों बढ़ा और दो बार खाने वाला सहज कैसे बना रहा। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि दस बार खाने वाले का मल उत्सर्जन तंत्र ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है।

ऐसे मामलों में तमाम कचरा जिसे शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए था, वह बाहर निकल नहीं पाता, क्योंकि पेट किसी वक्त खाली ही नहीं रहता। वह तो लगातार भरा हुआ है। जब पेट में खाना है और पाचन तंत्र काम कर रहा है तो मल उर्त्सजन तंत्र प्रभावशाली तरीके से काम नहीं कर पाता। सफाई तभी अच्छी तरह से होती है, जब पेट खाली होता है।

तब आप कम बीमार पड़ेंगे

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योग विद्या के जानकारों का कहना है कि कि दो बार के भोजन में छह से आठ घंटे का अंतर होना ही चाहिए। यह नियम सध जाए तो शरीर के उस चक्र का पता चल सकता है जब उसे भोजन की बिलकुल जरूरत नहीं रहती।

उस चक्र या जरूरत के अनुसार अपने आप के साथ व्यवहार करने पर काया फूल की तरह हलकी फुलकी रहने लगती है। और व्यक्ति योग के मार्ग से आसानी से चलने लगता है, अर्थात होश पूर्वक रह सकता है।


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