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जानिए, मनुष्य रूप में आने से पहले क्या थे आप?
ज्योतिर्मय
Updated Thu, 25 Apr 2013 01:10 PM IST
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डार्विन ने भले ही कहा हो कि मनुष्य का विकास बंदरों से हुआ, लेकिन अगर आप पुनर्जन्म को मानते हैं और यह भी कि मनुष्य शरीर की नहीं उसकी आत्म चेतना के विकास की परिणति है तो यह धारणा बदलनी पड़ेगी। सेनफ्रांसिस्को के राजयोग मेडिटेशन सेंटर में योग सिखा रहीं मां निवेदिता का कहना है कि मनुष्य योनि में आने से पहले आत्मा निश्चित रूप से गाय की योनि में रही होगी। इस स्थापना को मानें तो मनुष्य गाय की ही अगली योनि है।
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उन्होंने सेंटर में योग का अभ्यास कर रहे 28 साधकों के व्यवहार, सूक्ष्म अनुभव जो ध्यान के समय हुए अनुभव और स्वभाव में आए परिवर्तनों का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद लिखा। इन अनुभवों के अलावा गाय और मनुष्य की कई समानताओं का उल्लेख भी उन्होंने अपनी पत्रिका- 'योग इंटरनेशनल' में किया है।
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उसके अनुसार गाय जितनी सीधी-सादी, ममता और स्नेह से पूरित तथा सहनशील होती है, ये गुण सिर्फ मनुष्य में ही पाए जाते हैं। लोग अपने संस्कारों आसपास के वातावरण और उथलेपन के कारण भले ही शांत और सरल न होते हों लेकिन मूलत: वे गाय की आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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भारतीय भाषाओं का हवाला देते हुए उन्होंने एक सरल सात्विक व्यक्ति के लिए गाय जैसे विशेषण का उल्लेख किया। यह भी कि जिस बच्चे की मां नहीं होती है, उसके लिए भैंस, भेड़ या बकरी के दूध की तुलना में गाय का दूध सबसे ज्यादा सुकर और अनुकूल साबित होता है। कई बार मां के बहुत बीमार या अक्षम होने पर मनुष्य को गाय के दूध पर ही रखा जाता है।
भारत में वर्धा स्थित गो संवर्द्घन केंद्र द्वारा किए अध्ययन प्रयोगों के अनुसार गाय के दूध और मां के दूध में पोषक तत्व लगभग नब्बे प्रतिशत तक समान होते हैं। स्वामी रामानंद पुरी के अनुसार, योग साधना और पूजा पाठ अनुष्ठान आदि कर्मों में भी गाय का दूध सात्विकता और पवित्रता के कारण ही उपयोग में लाया जाता है।
उस दूध के औषधि उपचार और मनुष्य के पोषण की क्षमता के बारे में लगातार अनुसंधान होते रहे हैं। स्वामी पुरी के अनुसार इसलिए गाय को माता कहा जाता है जो ठीक ही है।