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71 सपनों में से सात को ही याद रख पाते हैं आप, पर क्यों?

Mon, 26 May 2014 09:11 AM IST
ज्योतिर्मय
ज्योतिर्मय Updated Mon, 26 May 2014 09:11 AM IST
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Unique world of dreams

विज्ञान कहता है कि मनुष्य सोते समय अगर इकहत्तर (71) सपने देखता है, तो मुश्किल से सात सपने ही याद रख पाता है। उनमें भी सिलसिलेवार देखें गए सपने तो एक या दो ही होते हैं।

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अगर देखे गए सभी सपने याद रखे जा सकें तो जागती हुई स्थिति में कुछ सोचने या याद रखने लायक शक्ति ही न बचे। इसलिए कुदरत या परमात्मा ने ऐसी व्यवस्था कर दी कि देखे गए ज्यादातर सपने याद ही न रहें। लेकिन यह तथ्य अपनी जगह है कि हर सपना कुछ - न कुछ कहता है।
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संसार के जानेमाने वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने मनुष्य जाति को महत्वपूर्ण जो कुछ भी दिया उसका अधिकांश सपमों की ही देन है। उदाहरण के लिए अल्बर्ट आंइस्टीन का प्रकाश की गति और सापेक्शता सिद्धांत का बोध तपनों में ही हुआ था।
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कहते हैं कि जब वे किशोर थे तो सपने में अक्सर देखते थे कि वे किसी ऊंची पहाड़ी से बहुत तेजी से उतर रहे हैं। बार बार देखा गया यग सपना प्रकाश की गति का सिद्धांत स्थापित किए जाने तक जारी रहा।

सापेक्षता सिद्धांत की खोज भी इसी तरह हुई। क्वांटम थ्योरी की खोज भी नील बोर ने सपने में एक रेस ट्रैक देख कर की। दार्शनिक रेने देकार्त ने प्राय: ऐसे सपने देखे जिनमें वे भटक रहे होते थे। इम सपनों ने उन्हें दर्शनशास्त्र की दुनिया में धकेला।

प्रसिद्ध विज्ञानी लूथर गिन्नार्ड का कहना है कि सपनों की अगर व्याख्या की जा सके तो यह जानना बड़ा रोचक होगा कि वे हमारे बारे में कितनी ऐसी अनकही बातें कहता है , जिनसे हम लगभग अनजान हैं।

होमियोपैथी ने तो जटिल रोगों के इलाज में सपनों के इस्तेमाल की विधा ही विकसित कर ली है। इस चिकित्साविधि के जनक डा. हेनीमेन का कहना था अगर एक ही तरह का स्वप्न बार - बार आता है तो उसका संबंध किसी रोग से भी हो सकता है।

जाने माने होमियोपैथ रोगी से अक्सर पूछते हैं कि उसे किस तरह के स्वप्न आते हैं। उस जानकारी की उपयोग दवा का चयन करने में किया जाता है।  

वेदांत तो मानता ही है कि संसार ही सपना है। इस स्थापना के बारे में प्रो. गिन्नार्ड का कहना है कि यह तथ्यात्मक रूप से सही है। सपने और सच में इतना साम्य है कि जागते हुए देखें तो उसे सत कह सकते हैं और सोते हुए देखें तो सपना।

सपनों को जानना और पढ़ना खुद को समझने की तरह है। सपनों के प्रति सचेत रह कर अपना विकास कम से कम पांच गुना तक किया जा सकता है। शुरुआत सपनों को व्यवस्थित रूप से लिखने से की जा सकती है।


शुरू में आपको सपनों का कोई खास अर्थ और संगति शायद दिखाइ न दे। लेकिन पांच छह सप्ताह तक लिखते रहें और उसे एक साथ पढ़ें तो अर्थ और रहस्य अपने आप खुलता जाएगा। अपने बारे में निश्चित ही कुछ ऐसी बातें पता चलें , जो खुद को रोमांच से भर देंगी।

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