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खुशनुमा जिंदगी के आसान नुस्खे
ज्योतिर्मय
Updated Fri, 12 Apr 2013 11:53 AM IST
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नुस्खे कह सकते हैं लेकिन एस्ट्रो साइंस सेंटर चेन्नई ने इन्हें अपनाने पर सुख
शांति की शर्तिया गांरटी करार दिया है। करीब तीन हजार लोगों की दिनचर्या में शामिल
आदतों और क्रियाओं का अध्ययन करने के बाद सेंटर के निदेशक डा. ए नरसिंहन ने कहा है
जो कहा है प्रयोग के तौर पर उन नुस्खों को अपनाया जा सकता है।
शुरु करते समय लग सकता है कि ये बेकार हैं लेकिन ये बहुत सी क्रियाएं ऐसी होती हैं जो मनुष्य बिना सोचे समझे भी करता है। अगर थोड़ी सी सजगता बरती जाए तो क्या हर्ज है? सेंटर ने जिन क्रियाओं को दैनंदिन जीवन में शामिल करने की सलाह दी है उनमें कुछ इस प्रकार हैं।
बिस्तर से उठते समय दोनों पैर जमीन पर एक साथ रखे, उसी समय इष्ट का स्मरण करें और हाथों को मुख पर फेरे। जहां तक हो सके सूर्योदय के पहले उठे और उगते सूर्य के दर्शन करें। उस समय कुछ देर के लिए कम से कम दो मिनट तक त्राटक करे।
घर में तुलसी और आक का पौधा लगाए। उनकी नियमित सेवा करे। पक्षियों को दाना डाले। स्नान करने के बाद स्नानघर को कभी गंदा न छोड़े। जितना हो सके भांजी और भतीजी को कोई न कोई उपहार देते रहे।
बुधवार को किसी को भी उधार न दें। वर्ष में कम से कम दो बार घर में किसी पाठ या मंत्रोक्त पूजन को ब्राह्मण द्वारा जरूर कराएं। जहाँ तक हो सके अन्न, वस्त्र, तेल, कंबल, अध्ययन सामग्री आदि का दान करें।
दान करने के बाद उसका उल्लेख न करें। अपनी राशि या लग्न के स्वामी ग्रह के रंग की कोई वस्तु अपने साथ हमेशा रखे। हो सके तो सुबह शाम उपासना या सप्ताह में किसी दिन, बेहतर हो कि अपने जन्मवार पर मंदिर या पूजा स्थल जाएं। डा.नरसिंहन का कहना है कि ये सूत्र लोगों की जीवनशैली का अध्ययन करने के बाद सामने आए हैं।
शुरु करते समय लग सकता है कि ये बेकार हैं लेकिन ये बहुत सी क्रियाएं ऐसी होती हैं जो मनुष्य बिना सोचे समझे भी करता है। अगर थोड़ी सी सजगता बरती जाए तो क्या हर्ज है? सेंटर ने जिन क्रियाओं को दैनंदिन जीवन में शामिल करने की सलाह दी है उनमें कुछ इस प्रकार हैं।
बिस्तर से उठते समय दोनों पैर जमीन पर एक साथ रखे, उसी समय इष्ट का स्मरण करें और हाथों को मुख पर फेरे। जहां तक हो सके सूर्योदय के पहले उठे और उगते सूर्य के दर्शन करें। उस समय कुछ देर के लिए कम से कम दो मिनट तक त्राटक करे।
घर में तुलसी और आक का पौधा लगाए। उनकी नियमित सेवा करे। पक्षियों को दाना डाले। स्नान करने के बाद स्नानघर को कभी गंदा न छोड़े। जितना हो सके भांजी और भतीजी को कोई न कोई उपहार देते रहे।
बुधवार को किसी को भी उधार न दें। वर्ष में कम से कम दो बार घर में किसी पाठ या मंत्रोक्त पूजन को ब्राह्मण द्वारा जरूर कराएं। जहाँ तक हो सके अन्न, वस्त्र, तेल, कंबल, अध्ययन सामग्री आदि का दान करें।
दान करने के बाद उसका उल्लेख न करें। अपनी राशि या लग्न के स्वामी ग्रह के रंग की कोई वस्तु अपने साथ हमेशा रखे। हो सके तो सुबह शाम उपासना या सप्ताह में किसी दिन, बेहतर हो कि अपने जन्मवार पर मंदिर या पूजा स्थल जाएं। डा.नरसिंहन का कहना है कि ये सूत्र लोगों की जीवनशैली का अध्ययन करने के बाद सामने आए हैं।