फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Yog-Dhyan ›   Tadasana the base of all asanas, know more by Iyengar Yogashraya

अयंगर योगः कभी भी करें ताड़ासन, होंगे कई फायदे

Thu, 21 Sep 2017 02:06 PM IST
रजवी एच. मेहता
रजवी एच. मेहता Updated Thu, 21 Sep 2017 02:06 PM IST
विज्ञापन
Tadasana the base of all asanas, know more by Iyengar Yogashraya

पिछले कॉलम में हमने आपको अष्टांग योग के 8 पहलुओं के बारे बताया था, जिसके शुरुआती आसन यम और नियम जिंदगी जीने की कला को सिखाते हैं। आज हम आपको एक अहम आसन के बारे में बताएंगे, जो बेसिक आसन में से ही एक है। ये आसन है ताड़ासन, ताड़ा मतलब पर्वत की तरह शांत एवं स्थिर और ताड़ के पेड़ की तरह लंबा खड़ा रहना।

विज्ञापन


ताड़ासन के अभ्यास से आप सीखेंगे कि कैसे खुद को स्थिर और सीधा खड़ा रखा जाए। ये आसन बेहद आसान है। ये सभी आसन का आधार होता है। यदि आपका आधार मजबूत होगा तो कोई भी संरचना उस पर बनाई जा सकती है। इसीलिए ये आसन आपके आधार को मजबूत करेगा। यहां हम आपको इस आसन को करने का तरीका बताने जा रहे हैं। 

विज्ञापन

 

ये भी पढ़ें-  अयंगर योग पार्ट 1: 195 सूत्रों में पिरोया गया है योग को, ध्यान से लेकर वर्कआउट है इसमें शामिल

विज्ञापन
विज्ञापन


- पैर, पैर की उंगलियों और टखनों को एक साथ रखते हुए खड़े हो जाएं।

- जमीन पर दोनों पैरों को पूरी तरह से आराम दें।

- घुटने और सामने की जांघों की मांशपेशियों को पीछे की तरफ घुमाएं।

- रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।

- कंधों को पीछे की ओर घुमाएं और ब्लेड्स अंदर ही तरफ रखें।

Tadasana the base of all asanas, know more by Iyengar Yogashraya

- अपने आर्म्स को पीछे से नीचे की तरफ बढ़ाएं।

​-उंगलियों के टिप्स को आगे बढ़ाएं, ताकि आप कोहनी के जोड़ों, कलाई और पोर तक स्पेस बना सकें।

- सिर को सीधा रखें।

- सामने की ओर बिल्कुल सीधा देखें।

- बिल्‍कुल सामान्य सांस लेते हुए इसी पोजीशन में खड़ें रहें।

जब आप पहली बार इस आसन को करते हैं तो भले ही आप अपने दोनों पैरों पर खड़े हों लेकिन आपको महसूस होगा कि आपका शरीर कभी दाएं तो कभी बाएं तरफ घूम रहा है। शरीर का वजन न तो आगे की तरफ न हीं पैरों के पीछे महसूस होगा। मतलब संतुलन बिगड़ा लगेगा यदि आपके साथ भी ऐसा ही हुआ है तो आप अपने तलवों को थोड़ा सा ऊंचा उठाएं और अपनी हड्डियों को फैलाएं और फिर तलवों को बिना किसी सहारे नीचे रखें,। ध्यान रहे तलवों की स्किन में जरा भी सिलवट न रहे। 

शरीर का बायां हिस्सा दाएं हिस्से की मिरर इमेज होता है। या यों कहें दोनों हिस्से एक दूसरे की मिरर इमेज होते हैं। कम से कम बाहर से तो ये बात पूरी तरह से सही है। आप खुद भी देखें, दो कान, दो नथुने, दो हाथ, दो पैर, चेहरा भी पूरी तरह से ऐसा की दो हिस्सों में बांटे बिल्कुल मिरर इमेज बने। हालांकि अंदर से ऊर्जा का वितरण एक सा नहीं होता है।

हमारी प्रवृत्ति होती है कि हम शरीर के दोनों हिस्सों का इस्तेमाल एक सा नहीं करते हैं। इसलिए ऊर्जा का वितरण एक समान नहीं होता है। ऐसे मे होता ये है कि एक तरफ ऊर्जा ही ऊर्जा होती है तो दूसरी तरफ ऊर्जा बिल्कुल ही नहीं होती है। ऊर्ज के इस असमान वितरण की वजह से शरीर के दोनों हिस्से कष्ट सहते हैं। बिल्कुल वैसे ही जैसे एक बाढ़ और सूखे से प्रभावित दोनों ही क्षेत्र दुख सहते हैं, नुकसान भुगतते हैं।   
 
 इसलिए जब ताड़ासन करें तो ध्यान रखें कि दोनों पैरों पर शरीर का वजन बराबर डालें। दाएं-बाएं और आगे पीछे दोनों तरफ बराबर वजन महसूस होना चाहिए। अगर आपको ऐसा करने में कठिनाई महसूस हो रही हो तो दोनों पैरों को 3-4 फीट की दूरी पर फैलाएं। मतलब पैरों के बीच की दूरी 3-4 फीट करें।
  
  आसन को करते वक्त केवल शरीर को ही स्थर नहीं रखना है बल्कि आंखों और मन को भी एकाग्र रखना है। आप जितनी बार चाहें उतनी बार इस आसन को कर सकते हैं। बशर्ते करना बिल्कुल वैसे ही है जैसे आपको बताया गया है। हम ऊपर आपको बता चुके हैं कि इस आसन के अपने तो कई बेहतरीन फायदे है हीं साथ ही दूसरे आसनों के लिए ये मजबूत आधार बनाने का भी काम करता है।  

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed