पूजा के बाद हवन जरूरी, यह रहा वैज्ञानिक कारण
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नवरात्र हो या दीपावली हर पूजा के बाद हवन करने का नियम है। इसके पीछे आमतौर पर धार्मिक कारण माना जाता है जबकि इसका एक बड़ा वैज्ञानिक कारण भी है। यज्ञ के समय जलाई जाने वाली सामग्री रोग उपचार के काम भी आती है।
सामान्य तौर पर जलाई गई अग्नि के अपने परिणाम हैं, उससे वस्तु, व्यक्ति और उपकरणों को गरम कर सकता है, लेकिन यज्ञ अग्निहोत्र में जगाई गई आंच व्यक्ति कई रोगों से भी मुक्त बनाती या उसके लिए रक्षा कवच का काम करती है।
ओहिजनबर्ग यूनिवर्सिटी (म्यूनिच) के शोध अनुसंधान में लगे अर्नाल्ड रदरशेड ने कहा है कि यज्ञ अग्निहोत्र से इतने रोगों का उपचार किया जा सकता है कि इस विधि को यज्ञोपैथी कहा जा सकता है।
यज्ञ से मिली है यह कामयाबी
शोधकर्ता ने क्षय, श्वास और फेफड़े की कुछ बीमारियों को अग्निहोत्र से ठीक करने में खासी कामयाबी हासिल की है। आहुतियों में वनौषधियों के प्रयोग के प्रभाव का उल्लेख करते हुए प्रो.रदरशेड ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में एक नई विधा जुड़ सकती है जिसे ′यज्ञोपैथी′ नाम दिया जा सकता है।
चिकित्साशास्त्री डा.समरसेन का कहना है कि पृथ्वी और उसके गर्भ से जन्म लेनी वाली वनस्पतियों के तत्व को सूक्ष्मरूप में ग्रहण करती हुई वायु या गंध शरीर की संभावित कमी की पूर्ति और विकारों का शमन करती है।
उनके अनुसार यज्ञ प्रक्रिया साधक-याजक के चारों ओर का प्रभाव क्षेत्र का मंडल बदल देती है। एक निष्कर्ष यह भी है कि यज्ञोपचार वस्तुतः मानसोपचार के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा प्रक्रिया है ।
जहां किसी औषधि का प्रभाव नहीं होता वहां औषधियों की वाष्पीभूत ऊर्जा पहुंचकर रोग विकारों का शमन कर सकती है