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मौसम की तरह हर तीन महीने में बदल सकते हैं अपना शरीर

Sat, 13 Jun 2015 11:19 PM IST
Updated Sat, 13 Jun 2015 11:19 PM IST
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जब जवानी से बुढ़ापे की ओर कदम बढने लगते हैं और चेहरे पर ढ़लती उम्र के निशान नजर आने लगते हैं तो यही ख्याल आता है कि काश बढ़ती उम्र की रफ्तार रोक ली जाए और फिर से जवान बन जाएं।

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सोचिए अगर आपकी यह चाहत पूरी हो जाए तो कैसा हो। आप कहेंगे कि यह सिर्फ कल्पना की बात है हकीकत में भला कैसे हो सकता है। लेकिन हम आपको बता दें कि यह बिल्कुल संभव है और विज्ञान ने अब इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
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अब आप भी महर्षि च्यवन की तरह अपने बुढ़ापे को अपने दूर करके फिर से जवानी पा सकते हैं यानी हमेशा हमेशा जवान दिख सकते हैं।

मनुष्य की त्वचा के कोश पांच दिन में बदल जाते हैं

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विज्ञान के अनुसार शरीर जिन कोशिकाओं से बना है, वे टूटती और टूटे फूटे रूप की जगह नए कोशों में तब्दील होती रहती हैं। जैसे सर्प की त्वचा चार से छह सप्ताह में केंचुल के रूप में अलग हो जाती है।

मनुष्य की त्वचा के कोश भी पांच दिन में बदल जाते हैं। अस्सी दिन में तो प्रोटीन पूरी तरह बदल कर नई हो जाती है। पुरानी का कहीं पता नहीं चलता।

सेन गियागो की संस्था शार्प कम्युनिटि मेडिकल ग्रुप के प्रो.केनिथ रोसले का कहना है कि मनुष्य के कोशों को निरंतर सक्रिय और स्वस्थ रखना संभव हो तो उसका शरीर तीन सौ वर्ष तक कायम रह सकता है। कोई गड़बड़ी न आए तो गुर्दे 200 वर्ष, हृदय 300 वर्ष तक रखे जा सकते हैं।

बारह सप्ताह में बदल कर मिलेगा नया शरीर

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इसके बाद उन्हें बदला भी जा सकता है। हृदय प्रतिरोपण के प्रयोग तो बहुत बेहद सफल हुए हैं। इसके अतिरिक्त चमड़ी, फेफड़े और हड्डियों को क्रमशः एक डेढ़ और चार हजार वर्ष तक दुरुस्त रखा जा सकता है।

इन्हे बदलना आसान हुआ और कोशिकाओं के बारे में प्रयोग कामयाब हुए तो वह दिन दूर नहीं जब वृद्ध व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा बारह सप्ताह में बदल कर नया किया जा सकेगा।

और कोश तो बदल जाते हैं, पर वे कोश जो नाड़ियां बनाते हैं, न बदलते हैं और न ही पुराने से नए होते हैं। सामान्य कोशों से अलग इन कोशों की आकृति बड़ी विचित्र होती हैं। एक वर्ग सेंटीमीटर जगह में अठाइस लाख तक समा जाने वाले इन कोशों का मुंह मोटा और पूंछ सांप की तरह पतली होती चली जाती है।

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