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बड़े हों या छोटे रोग, हर बीमारी का एक बड़ा कारण यह है

Fri, 13 Feb 2015 10:52 AM IST
Updated Fri, 13 Feb 2015 10:52 AM IST
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reason of disease

जिसकी इच्छा आज्ञा के बिना कोई काम न होता हो, वह मालिक ही तो हुआ। अपना मालिक तलाशें तो पाएंगे कि वह बाहर कहीं नहीं अपने ही भीतर है, अपना मन। शरीर स्वस्थ और निरोग रहता है तो मन ही कारण है और बीमार पड़ता है तो भी मन की ही वजह से।

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अमेरिका के मन:शास्त्री और मनोरोग चिकित्सक डॉ. डैनियल कापोने ने एक अध्ययन के बाद कहा है दूसरे रोगों की तो बात तो छोड़े सर्दी जुकाम जैसी मामूली समस्याएं भी मन में पलने वाली चिंता, कुंठा, उलझनों और ग्रंथियों के कारण होती हैं। जटिल रोग भी वहीं उपजते हैं। और चिकित्सा भी वहीं अर्थात मनस्क्षेत्र में की जानी चाहिए।
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उनके अनुसार जुकाम का निमित्त कारण विषाणु का आक्रमण होता है पर उनकी प्रकृति अन्य विषाणु सजातियों से सर्वथा भिन्न होती है। चेचक, खसरा आदि रोगों का आक्रमण एक बार होने पर शरीर में उनके रोगाणुओं से लड़ने की शक्ति आ जाती है। इसलिए इन रोगों के दोबारा होने का खतरा नहीं रहता।

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बीमारियों से छुटकारा पाना हो तो

reason of disease

सर्दी जुकाम पर यह बात लागू नहीं होती। वह कई बार होता और लगातार बना रहता है। जब तक तनाव कम नहीं होता, वह नियंत्रण में आता भी नहीं, चाहे कितनी ही एंटीबायोटिक्स, एंटीएलर्जिक ड्रग्स ली जा रही हों। सामयिक रूप से यों तो जुकाम दवाओं से एक बार अच्छा हो जाता है किन्तु तुरंत बाद होने पर दुबारा उससे अच्छा नहीं होता।

पिछले एक दशक में तैयार हो कर निकले साइक्रियाट्रिस्ट और फिजीशियन अब उपचार करते समय रोग परीक्षण के साथ रोगी के मनोविश्लेषण पर भी ध्यान देने लगे हैं।

प्रचलित चिकित्सा पद्धति मनुष्य को कुछ रासायनिक तत्वों का जोड़ भर मानकर चलती है और स्वास्थ्य में खराबी का कारण इन रासायनिक संतुलनों का गड़बड़ा जाना मात्र समझती है। दवाएं परहेज, उपचार और शल्य चिकित्सा आदि सभी उपाय इस लड़खड़ाते संतुलन साधने के लिए किए जाते हैं।

यह रासायनिक संतुलन दवा और उपचार से कुछ समय के लिए स्थापित भी हो जाते हैं। किन्तु डॉ. डैनियल कापोने अनुसार रोग बीमारियों से छुटकारा पाना हो तो इलाज से ज्यादा मन को संतुलित करने पर जोर देना चाहिए।

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