जानिए, मरने के बाद भी कैसे काम करता रहा उनका वह शरीर
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अगर आपको लगता है कि आप अकेले ही काफी नहीं हैं तो कोई बाद नहीं आप चाहें तो अपने नए रूप भी गढ़ सकते हैं।
यह सिर्फ किस्से कहानियों की बात नहीं है कुछ शोध बात का संकेत दे रहे हैं कि हम चाहें तो अपने जैसे छाया पुरुष या हमजाद तैयार कर सकते हैं। इनसे अपने काम भी पूरा करवा सकते हैं।
नीदरलैंड के जीव विज्ञानी डा. नेल्ली वाटसन ने पिछले साल 'एंटी मैटर एंड साउल’ पुस्तक लिखकर प्रतिपादित किया कि स्वप्न शरीर की रचना सपनों और कल्पनाओं से ही नहीं होती, रासायनिक क्रिया के जरिए भी रचा जा सकता है।
मृत्यु के बाद भी काम करता रहा शरीर
प्रयोगशाला में जब टेस्टट्यूब बेबी तैयार किया जा सकता है तो छायापुरुष की रचना भी की जा सकती है। ऐसी घटनाओं का तो अंबार है जिनमें छायापुरुष से आमना सामना हुआ।
वे बाकायदा जांची परखी या ऐसे लेखकों द्वारा लिखी गई है जिनकी प्रामाणिकता असंदिग्ध है। सत्रहवीं शताब्दी के दार्शनिक जॉन ओब्रे ने एक किताब लिखी है 'ब्रीफ लाइव्स’। इस में ऐसे अनेक प्रसंगों की चर्चा की।
प्रख्यात ज्योतिषी सर रिचर्ड नेपियर ने अपने ऐसे शरीर की रचना अनजाने में की, जो उनकी मृत्यु के बाद भी काम करता रहा।
क्या वह काला जादू था?
जॉन बास्को ने अपनी कृति 'स्ट्रेंज एनकांउण्टर्स’ में ऐसी कई घटनाओं का वर्णन किया है, जब व्यक्ति को अपने ही ब्लू प्रिन्ट से सामना हो गया हो। शुरु में लोगों को हैरानी हुई। कुछ ने उन घटनाओं को काला जादू समझा।
पढ़ने सुनने में ऐसी घटनाएं अटपटी जान पड़ती हैं और नजरों का धोखा भी लगती है, पर साधना विज्ञान के छाया-पुरुष वाली मान्यता उक्त भ्रान्ति को दूर करने का प्रयास करती है।
व्यक्ति नियमित अभ्यास के जरिए अपना न सिर्फ छाया-पुरुष तैयार कर सकता है, अपितु उससे अनेक ऐसे भी कार्य करवा सकता है, जो स्वयं उसके लिए संभव नहीं।