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आंखें आपको कितना कुछ दिखाती हैं, जरा आंखों के ये राज भी जान लें

Wed, 22 Jul 2015 09:32 AM IST
Updated Wed, 22 Jul 2015 09:32 AM IST
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mystery of eyes

कितने ही संवेदनशील और उन्नत कैमरे बन जाएं, लेकिन वे आंखो की तरह संवेदनशील और सक्रिय नहीं हो सकते। आंखों की पलकें एक मिनट में तीस सेकेंड बन्द रहती और लगभग उतनी ही देर खुली रहती हैं। यह सिलसिला निरंतर और अनायास ही चलता रहता है। पर आश्चर्य कि इसका पता तक नहीं चलता।

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शरीर विज्ञानियों के अनुसार आंखें गर्भस्थ शिशु के पांच महीने का होते तक बन पूरी जाती हैं। जन्म के बाद छह वर्ष की उम्र तक उनका विकास होता रहता है। लेकिन मस्तिष्क के जिन केंद्रों से उसका जुड़ाव बनता है, उनका विकास होने में करीब पचीस वर्ष लग जाते हैं।
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नवसारी (गुजरात) मेडिकल कालेज में पेडियाट्रिक विभाग की प्रमुख डा. लीला बेंजामिन का कहना है कि शरीर के विकास की यह प्रक्रिया पचीस वर्ष की उम्र में स्थिर हो जाती है। सभ्यता के विकास और प्रयोगों की शुरुआती शताब्दियों तक पचीस वर्ष की उम्र गुरुकुलों में या विद्यापीठों में ही बिताई जाती थी। उसका कारण शरीर और मन का पूरी तरह विकसित हो जाना ही रहा हो तो कोई आश्चर्य नहीं है।
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आंखों के ये रहस्य तो और भी चौंकाने वाले हैं

mystery of eyes

शरीर और मन के भीतर कुछ भी चल रहा हो तो उसकी प्रतिक्रिया पहले आंखों में ही होती है। शरीर विज्ञानियों का कहना है कि पलकें आंखों के गोलको के लिए प्रहरी की भूमिका में होती हैं। उनके निचले भाग में अश्रु जल सा द्रव बहता रहता है। यह नेत्र गोलकों के लिए मोटर गाड़ियों के शीशे पर लगे ‘विन्डशील्ड वाइपर’ की तरह काम करता है। पलकें झपकने की क्रिया और यह आंखों की निरंतर सफाई करते रहते हैं।

आंखें डेढ़ सौ तरह के रंग पहचान सकती है। उनकी बनावट अजीब है। स्लोलाइट की तरह पारदर्शक, चमड़े की तरह मजबूत, रबड़ की तरह लचीली, स्फटिक की तरह स्वच्छ और कभी न घिसने-टूटने वाली वस्तुओं से मिलकर आंखें बनी हैं। इसके साथ ही दूर की और पास की चीजें देखने की क्षमता भी इस नेत्र कैमरे में विद्यमान हैं।

आंखे जिस कोण से देखती और उन दृष्यों को मस्तिष्क के जिस केंद्र तक पहुंचाती है, उसकी लंबाई जरा सी है। पर उतनी सी जगह में करीब 13 करोड़ 70 लाख कोष होते हैं। बिंब इतने कोषों की कड़ी जांच पड़ताल के बाद ही मस्तिष्क तक पहुंचाता है। कुदरत या भगवान की अनमोल संरचना है आंखे और उस दिव्य सत्ता का प्रमाण भी।

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