दूध पीते हैं तो जान लीजिए, फायदे कुछ नहीं नुकसान कितने है

Rakesh Jhaराकेश कुमार झा Updated Wed, 07 May 2014 01:15 PM IST
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यह धारणा गलत साबित हो रही हैं कि अपने आहार में दूध भी शामिल रखने वाले लोग सात्विक भोजन करते हैं। प्रोटेस्टेंट ईसाइयों की एक छोटी सी शाखा क्वेकर संप्रदाय के अनुयायियों ने तो सत्रहवीं शताब्दी से ही दूध और उससे बने आहार का निषेध शुरु कर दिया था।
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उनका कहना था कि दूध मांसाहार भोजन है अर्थात पशुओं से प्राप्त होने वाले मांस की तरह है। उनके अनुसार बच्चा जब तक अपनी मां का दूध पीता है तभी तक ठीक है। उसके दो तीन साल का होने के बाद मां जब स्तनपान नहीं करा पाती तो समझ लेना चाहिए कि दूध की जरूरत खत्म हो गई।
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वासना और हिंसा को बढ़ाते हैं दूध

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