{"_id":"8f17fbb8-e224-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"healthy-food-could-be-harmful","type":"story","status":"publish","title_hn":"पौष्टिक भोजन भी नुकसान दायक हो सकता है","category":{"title":"Yog-Dhyan","title_hn":"योग-ध्यान","slug":"yoga"}}
पौष्टिक भोजन भी नुकसान दायक हो सकता है
ज्योतिर्मय
Updated Mon, 01 Jul 2013 01:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वस्थ और सुखी रहने के लिए पौष्टिक भोजन उतना जरूरी नहीं है, जितना उसका संस्कारी होना। संस्कारी का अर्थ कोई गुण, शील और स्वभाव नहीं है, बल्कि आशय उसकी प्रकृति से है। पौष्टिकता के लिहाज से मांस, मछली, अंडे जैसे प्रोटीन विटामिन युक्त आहार ज्यादा गुणकारी होते हैं। लेकिन अध्यात्म विज्ञानियों के अनुसार प्रोटीन, विटामिन और वसा युक्त भोजन से ज्यादा गुण और प्रभाव में सात्वकिता के संस्कार जगाने वाला आहार ही ज्यादा उपयोगी है।
विज्ञापन
पोषण की दृष्टि दूध, दही, गेंहू, चावल, दाल और ताजे मौसमी फल से मांसहार भले ही बाजी मार लें लेकिन संस्कार एवं सात्विकता में इनसे हलके ही साबित होते हैं। भगवद्गीता में बताए सात्विक खाद्यों को मनुष्य के आंतरिक विकास और पोषण के लिए पर्याप्त बताते हुए योगविद् डा. ओपी मल्होत्रा का कहना है कि बहुत से गरिष्ठ पदार्थ जो आहार विज्ञान की दृष्टि से ऊर्जा से परिपूर्ण हो लेकिन जरूरी नहीं कि वे सात्विकता की कसौटी पर भी खरे उतरते हों।
विज्ञापन
आध्यात्मिकता या आयुर्वेद की दृष्टि से आहार मुख्य रूप से तीन तरह का है। पहला सात्विक आहार जिसमें ताजे फल, रसयुक्त, हल्के और सुपाच्य पदार्थ शामिल होते हैं। सात्विक भोजन में नींबू, नारंगी और मिश्री का शरबत, लस्सी जैसे तरल पदार्थ बहुत लाभप्रद हैं। इनसे चित्त एकाग्र तथा पित्त शांत रहता है।
विज्ञापन
एक पहर से ज्यादा समय पहले पकाए गए, बासी, सूखे और सड़े गले पदार्थ राजसी होते हैं और अरुचिकर, देर से पचने वाले और स्वभाव के विपरीत तेज, मिर्च मसाले वाले, गरिष्ठ और जानवरों से तैयार किए गए आहार तामसी श्रेणी मे आते हैं।
इस प्रकार के भोजन भले ही पर्याप्त पोषक हों, पर प्रभाव की दृष्टि से वे प्रमाद और बुरी प्रवृत्तियों को बढ़ाने वाले ही साबित होते हैं। डा. मल्होत्रा के अनुसार बाजार में मिलने वाले लगभग सभी पकवान या खाद्य व्यंजन, मिठाइयाँ, चाय, कॉफी, कोको, सोडा, पान, तंबाकू, मदिरा आदि राजसी और तामसी होते हैं। इसलिए जिन्हें अपने आपको स्वस्थ, सुदृढ देखना हो उन्हें आहार का चुनाव करते समय उसके संस्कार को भी देखना चाहिए।