आप भी मानेंगे बीमारी का गहरा नाता है आपके पूर्वजन्म से
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आमतौर पर जब कोई व्यक्ति बीमार होता है तो इसका तात्कालिक कारण ढूंढा जाता है जैसे किसी का पेट खराब हो गया तो कह देते हैं कि चुटर पुटर खाया होगा इसलिए पेट गड़बड़ हुआ है। किडनी में खराबी आई तो मन में सीधा सवाल उठता है कि व्यक्ति खूब शराब पीता होगा इसलिए किडनी खराब हो गई है।
इसी तरह की बातें आमतौर पर हम सभी करते हैं। लेकिन आप अगर गहराई से देखेंगे कि शराब नहीं पीने वाले को भी किडनी की परेशानी हो जाती है। तंबाकू का सेवन नहीं करने वाले को भी कैंसर पकड़ लेता है।
आयुर्वेद और सांई संगठन के अनुसार बीमारा का संबंध महज इस जन्म से नहीं बल्कि पूर्वजन्म से है। आगे जिस व्यक्ति के बारे हम बात करेंगे उसकी कहानी तो कुछ इसी तरह की बात को बयां करती हैं।
पूर्वजन्म की गलती से त्वचा रोग
पुरंदर पुर (महाराष्ट्र ) की यशोदा ताई की खुजली की बीमारी ठीक नहीं हुई कई तरह से इलाज किया। संयोग से शिरड़ी से सांई मिशन के योगी बाबा धूनी राम पुरंदरपुर आए तो यशोदा भी उनसे मिलने गई।
योगी बाबा ने थोड़ा जांचा-परखा। ध्यान करते हुए बताया कि पिछले जन्म में उसने एक संन्यासी पर जलते हुए अंगारे फेंके थे। जब तक वह जलने, चोट खाने, खुजली आदि से परेशान लोगों की सेवा करने पर ही वह ठीक होगी। यशोदा ने आठ महीने तक इस तरह की सेवा की और ठीक हो गई।
पूर्वजन्म के पाप इस जन्म में कष्ट देते हैं
सांई संगठन का मानना है कि अस्सी प्रतिशत रोग पिछले जन्म के पापों से हैं। रिग्रेशन थैरेपी का सिद्धांत भी लगभग यही है। इस चिकित्सा पद्धति के घोर समर्थक कन्याकुमारी केंद्र के अनंतनाथ का कहना है कि प्रायश्चित किया जाए तो नब्बे प्रतिशत रोग यहां तक कि जटिल रोग भी, ठीक हो सकते हैं। इस दिशा में खोज जारी है।
आयुर्वेद में कहा है कि पिछले जन्म में किए गए पाप ही इस जन्म में रोग बनकर पीड़ा देते है। कोई रोग हो तो इस कोण से निदान ढूंढा जा सकता है, पर नहीं हो तो भी सावधानी रखना चाहिए कि किसी को कष्ट न पहुंचे।
अगर किसी तरह का रोग हो तो उसे स्वाध्याय साधुजनों की संगति से ठीक किया जा सकता है। ज्योतिष के जानकार तो जन्म, बचपन और उसके बाद अनायास कोई रोग होने वाली स्थितियों को भी पिछले जन्म का परिणाम मानते हैं। बहरहाल इस दिशा में अनुसंधान की जरूरत है।