किसी मशीन में पकड़ी नहीं जा सकता है, ऐसा है यह मानव बम
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आप देखेंगे उस टुकड़े में जो पृथ्वी का सबसे लघुतम टुकड़ा होगा, कैसी हलचल मची हुई है। आप उस छोटाई का अनुमान नहीं कर सकते हों तो एक सेंटीमीटर में उन परमाणुओं को बिछाकर देख लें, इतनी सी जगह में एक करोड़ परमाणु आराम से बैठे मिलेंगे।
इतना छोटा कि जिसकी कल्पना भी न की जा सके। अब इसका नाभिक (न्यूक्लियस) देखते हैं तो लगता है, यह तो और भी छोटा है। एक सेंटीमीटर स्थान में एक हजार करोड़ नाभिक मजे में आ सकते हैं। इस छोटी से छोटी स्थिति में कितनी हलचल है, उसे देख पाएं तो पता चलेगा कि कण कण में प्रकाश की गति से (करीब तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चीजें दौड़ रही हैं।
एक और उदाहरण से देखें। चेतना जितनी सूक्ष्म है, उतनी ही विराट भी। पानी का एक परमाणु एक सेकेंड में 30 खरब टक्करें लेता है, उसकी एक परिक्रमा की दूरी सेंटीमीटर के ढाई करोड़वें भाग जितनी होती है पर इतनी सशक्त कि यदि उसे छेड़ दिया जाए तो इसी परमाणु की चेतना संपूर्ण पृथ्वी को जलाकर खाक कर सकती है। बमों की रचना में इसी शक्ति वाले भाग को छेड़ा जाता है।
ऋषियों ने इस गूढ़ रहस्य को नेति कहा है
मनुष्य की भावनात्मक चेतना में उससे भी कई गुनी प्रचण्ड और चमत्कारिक शक्ति होती है, जो कभी−कभी ही प्रभाव में आती है। यह चेतना शक्ति ही समुद्र, वायु, वृक्ष−वनस्पतियों और मनुष्यों तक में काम करती रहती है। विनाशकारी रूप ले तो पृथ्वी में दिखाई देने वाली हलचल स्थगित हो जाए।
और हलचल रुक जाए या कोई गड़बड़ी आ जाए तो इतनी ऊर्जा उत्पन्न हो कि मनुष्य का शरीर खाक होकर नष्ट हो जाता है। उपनिषद के ऋषियों ने इस गूढ़ रहस्य को ही नेति कह कर गाया है।
सामान्य अवस्था में यह शक्ति सोई हुई या निष्क्रिय अवस्था में होती है। इसलिए वह समझ में नहीं आती या उसका प्रभाव दिखाई नहीं देता, किन्तु इसे किसी तरह जागृत कर लिया जाए तो मनुष्य सूर्य चेतना की तरह समर्थ और शक्तिशाली हो सकता है।
सामान्य और सुषुप्त अवस्था की चेतना शक्ति सूर्य की चेतना के समान ही दृष्टिगोचर नहीं होती पर वह शक्ति है असंदिग्ध है। उसे प्रकट करने का नाम ही साधना है। किसी समय वह प्रयोग आत्मिक स्तर पर होते थे, अब विज्ञान के स्तर पर सीधे पदार्थों के जरिए हो रहे हैं।