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आपके शरीर को सुडौल बनाएगा चक्रासन

Fri, 24 Aug 2012 05:32 PM IST
Updated Fri, 24 Aug 2012 05:32 PM IST
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chakarasan will make your body Curvy

इस आसन में शरीर की स्थिति चक्र के समान होती है इसलिए इसे चक्रासन कहते हैं। योग शास्त्र में इस आसन को मणिपूरक चक्र कहा जाता है। यह आसान थोड़ा कठिन होता है इसलिए अभ्यास करने वालों को पहले अर्द्धचक्रासन करना चाहिए। इसके बाद चक्रासन का अभ्यास करना चाहिए।

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ऐसे करें अर्द्धचक्रासन

  • इसके अभ्यास के लिए दोनो पैरों के बीच एक से डेढ़ फुट की दूरी बनाकर खड़े हो जाएं।
  • दोनो हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर हाथों को सिर के ऊपर रखें।
  • इसके बाद हाथों को ऊपर करते हुए पूरे शरीर मे खिंचाव लाएं। फिर शरीर को कमर से पीछे की ओर हल्का झुकाते हुए ऊपर की ओर देखें। इस स्थिति में 1 से 2 मिनट तक रहें और फिर सामान्य स्थिति में आ जाएं। इस क्रिया को 5 से 10 बार दोहराएं।
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चक्रासन की विधि
  • चक्रासन करने के लिए सबसे पहले फर्श पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • फिर दोनों पैरों के बीच लगभग डेढ़ फुट की दूरी बनाएं और दोनों पैरों के तलवों व एड़ी को फर्श पर बिल्कुल टिकाकर रखें।
  • दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़कर हथेलियों को कंधे के पास फर्श पर इस प्रकार से लगाएं कि उंगलियों का रुख पैरों की ओर रहे।
  • फिर दोनों हथेलियों व पैरों पर जोर देते हुए हाथों व पैरों के सहारे शरीर के बीच का हिस्सा धीरे-धीरे जितना संभव हो उतना ऊपर उठाएं।
  • इस स्थिति में 15 से 20 सेकेंड तक रहें। फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं। 4 से 5 बार इस आसान का अभ्यास करना ही काफी लाभप्रद होता है।
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चक्रासन से लाभ
  • इस आसन के अभ्यास से शरीर में रक्त का प्रवाह तेज होता है।
  • रीढ़ की हड्डियों एवं फेफड़ों में लचीलापन बना रहता है। इसके अभ्यास से छाती चौड़ी, कमर पतली व लचीली रहती है।
  • यह आसन शारीरिक थकान, उदासी, सिरदर्द, कमरदर्द की शिकायत दूर हो जाती है और छाती चौड़ी तथा मेरूदंड लचीला बनता है।
  • गैस्ट्रिक एवं बदहजमी की परेशानी में भी यह काफी लाभप्रद होता है।

सावधानी
महिलाओं को गर्भावस्था एवं मासिक धर्म के समय इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
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