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कीर्तन करने के हैं बड़े ही फायदे
ज्योतिर्मय
Updated Thu, 04 Apr 2013 09:41 AM IST
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एक ही शब्द के बार-बार उपयोग से मानसिक जड़ता आती है। मनस्विद् यह मानते थे लेकिन कीर्तन के संबंध में कुछ और ही निष्कर्ष सामने आए हैं। आस्ट्रेलिया में इंटरनेशनल सोसायटी फॉर श्रीकृष्ण कांशसनेस के स्वामी ब्रजभूषणदास गोस्वामी ने मेडिलेब के हवाले से कहा है कि कीर्तन नादयोग का एक अंग है, जिसमें आप ध्वनि तरंगें उत्पन्न कर चेतनतापूर्वक उसका अनुसरण करते हैं।
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कीर्तन द्वारा आप स्वयं को शरीर तथा बाह्य वातावरण से दूर ले जा सकते हैं। इसके अभ्यास से मानसिक जड़ता नहीं संवेदना घनीभूत होती है। सामान्य तौर पर किसी शब्द को दोहराने से मन की कमजोरी जाहिर होती है पर जब आप कीर्तन करते है तब आपके मन से संघर्ष नहीं होता।
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इस रहस्य को भारत के लोग अच्छी तरह जानते हैं। मेडिलेब में ध्यान और कीर्तन पर किए प्रयोगों का ब्यौरा देते हुए इस्कान के स्वामी ने लिखा है कि योग के कठिन अभ्यासों और साधना के साथ मधुर कीर्तन रूपी नादयोग का अभ्यास सोने में सुहागे का कार्य करता है।
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कीर्तन की कुछ धुनें सीखकर समूह में उनका अभ्यास कीजिए। कीर्तन को प्रभावी बनाने के लिए हारमोनियम, मृदंग और मंजीरों का उपयोग करना चाहिए। इन वाद्यों के साथ अपने हृदय पक्ष और श्रद्धा का संपुट भी कीजिए। कीर्तन के द्वारा आप स्वयं को कुंठाओं से मुक्त कर सकते हैं।
याद रखिए, कीर्तन कोई बौद्धिक योग नहीं है। कीर्तन में उत्पन्न हर ध्वनि तरंग आपकी चेतना की गहराई में उतरती है। बुद्धिजीवी कीर्तन को यदि बुद्धि के माध्यम से समझने की कोशिश करें तो संभवत: उनके पल्ले कुछ नहीं पड़ेगा, क्योंकि कीर्तन का प्रयोजन व्यक्ति के भावनात्मक पक्ष को छूना है।
यद्यपि भावनाओं को न तो समुचित ढंग से समझा जाता है और न ही उनका उपयोग किया जाता है, तथापि उन्हें व्यक्ति के हाथ में अत्यंत प्रभावी उपकरण माना जाता है।
बुद्धि के द्वारा आप कभी भी चेतना की गहराई में नहीं उतर सकते और न ही उसे पकड़ सकते हैं। हां बुद्धि के द्वारा ब्रह्म, जगत, सत्य आदि की सैद्धांतिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। परंतु इनका अनुभव कदापि नहीं कर सकते।