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विज्ञान की नजर में भी सच्ची दोस्ती बहुत ही फायदेमंद है

Sun, 24 Jan 2016 03:35 PM IST
Updated Sun, 24 Jan 2016 03:35 PM IST
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benefits of  friendship

निर्मल मित्रता अर्थात दूसरों के प्रति स्नेह सदभाव और सहयोग करने की आदत पहली नजर में घाटे का सौदा लगती है, लेकिन असलियत यह है कि फायदा इसी से होता है। जर्मनी के मनोविज्ञानी लुई केशर का कहना है कि इस तरह व्यक्ति अपना आपा बढ़ा रहा होता है।

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उसकी संवेदना का दायरा जितना बड़ा होता है, उसका सहयोग करने वाली और सुख दुख बटाने वाली शक्तियां भी उतनी ही फैलती जाती हैं। योगसूत्रों का हवाला देते हुए केशर का कहना है कि दूसरो के सहयोग और सेवा का अभ्यास व्यक्ति की आन्तरिक गुत्थियों को सुलझाता है।
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किस तरह? बताने के लिए केशर अपने प्रयोगों का उदाहरण देते हैं। उन्होंने एक सौ अठारह प्रयोग या अध्ययन किए, और ज्यादातर में पाया कि दूसरों के प्रति सहयोग की भावना रखने वाले लोग अपनी तरह के दूसरे लोगों से तीस प्रतिशत तक ज्यादा और बिना थके काम करते हैं। कहीं कभी नाकाम भी हो जाते हैं तो मन पर किसी तरह का दबाव नहीं पड़ता।
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दोस्ती से बढ़ती है बौद्ध‌िक क्षमता

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एक प्रयोग का ब्योरा देते हुए केशर ने बताया कि ग्रुप में चालीस व्यक्ति ऐसे शामिल किए गए थे, जो मानसिक तौर पर अविकसित थे और उनका बुद्धिलब्द्धि अंक चार से भी कम था। यानी वे सिर्फ भूख प्यास और उत्सर्जन के दबावों को ही समझ पाते थे। इस तरह के लोगों को एक स्वयंसेवी संस्था जीए‍मीन में रखा गया।

उस संस्था के निवासी सदस्यों को भोजन, पानी, सोने, खेलने और पढ़ने लिखने के अलावा मनोरंजन आदि के कामों में भी एक दूसरे के साथ होने और हाथ बटाने वाली जीवन शैली का अभ्यास करना होता था।

पांच सप्ताह की इस शैली का अभ्यास करने के बाद जीमीन में आए अनिवासी सदस्यों की एकाग्रता, कर्मठता और समझ तीस प्रतिशत तक बढ़ी थी। करीब आठ सप्ताह बाद, परखा गया तो पता चला कि लब्धिअंक (कुल विकास की औसत स्थिति) अठारह प्रतिशत पर आकर स्थिर हो गई है।

सच्ची म‌‌ित्रता की पहचान

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इस विकास को योगसूत्रों की नजर से परिभाषित करते हुए वैद्यराज और योगचिकित्सक सत्य आनंद का कहना है कि व्यवहार की गड़बड़ियां भी मन को चंचल और अस्थिर कर देती है। कोई चिंतनीय समस्या नहीं हो तो भी मित्रता का अभ्यास व्यक्ति की आंतरिक क्षमता को बढ़ाता है।

आमतौर पर लोग कोई लाभ उठाने के उद्देश्य से ही मित्रता करते हैं। इस लाभ और लोभ के चलते मैत्री के दर्शन नहीं हो पाते। बस मित्रता का दिखावा होता है।

इस तरह की मित्रता में असल तो सुखी और आनन्दित व्यक्ति के प्रति मन ईर्ष्या से भर जाता है। खुशी और कामयाबी के साथ आंतरिक क्षमता का विकास बिना किसी उद्देश्य और स्वार्थ के किए गए सहयोग और सेवा संबंध से ही होती है।

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