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मृत्यु और पुनर्जन्म के बीच इस तरह चलता है आत्मा का सफर

Mon, 01 Sep 2014 12:37 PM IST
Updated Mon, 01 Sep 2014 12:37 PM IST
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atma after death and before rebirth

मौत को एक कभी खत्म न होने वाली नींद मानने वालों के सामने भी सवाल है कि आखिर चेतना आती कहां से हैं। यही एक सवाल है जो वैज्ञानिकों को भी पुनर्जन्म की संभावना को रद्द नही करने देता। वरना तो शरीर के साथ ही जीवन का अंत हो जाने के विचार या विश्वास के सही होने की पूरी संभावना है।

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पुनर्जन्म और मृत्यु के बाद भी जीवन के सिद्धांत को धर्मशास्त्रों, प्रचलित विश्वासों और तर्क की कसौटी पर सौ प्रतिशत सही साबित करने वाले बुद्धिजीवियों का कहना है कि मृत्यु के बाद का जीवन इस दुनिया में चल रहे कानून कायदों से अलग है।
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उनके अनुसार इस दुनिया में एक खून की सजा भी फांसी है और चार खून की सजा भी फांसी। मगर मृत्यु के बाद वाले जीवन में हत्या करने वाले को अपनी मौत के बाद इन चारों खूनों की सजा अलग-अलग भुगतनी पड़ती है। उसने जिस-जिस जीव को दु:ख पहुंचाया है, उसका परिणाम मौत के बाद उसे झेलना पड़ता है।

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मृत्यु के बाद भी जीवन का अस्तित्व

atma after death and before rebirth

इस मान्यता को आप चाहें तो पुनर्जन्म और परलोक से जोड़ सकते हैं। आस्थावादियों का कहना है कि भले ही इस सिद्धांत के हक में पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलते हों लेकिन इसे मानने में हर्ज नहीं है।

कर्मफल की यह आस्था लोगों को नैतिक और न्यायप्रिय बनाए रखने में मददगार है। स्पिरचुअल एकेडमी एंड रिसर्च सेंटर (सार्क) की अध्ययन और शोध टीम ने हाल ही में एक अध्ययन किया और पाया कि ज्यादातर लोग जीवन के नाशवान या निरंतर चलने वाले पचड़े में नहीं पड़ना चाहते।

उनके अनुसार मृत्यु के बाद भी जीवन का अस्तित्व मौजूदा जिंदगी को संयत और संतुलित बनाए रखने के लिए उपयोगी है और इसलिए वह सही भी है। सार्क ने इस विषय पर फिल्म भी बनाई है। फिल्म के एक हिस्से की शूटिंग हरियाणा और दिल्ली के आसपास के इलाकों में हुई थी।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक और शोध

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मृत्यु के बाद जीवन के अस्तिव पर हुई शोधों मे दो शोध (रिसर्च) महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। उनमें एक अमेरिका की वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ. इयान स्टीवेन्सन के निर्देशन में हुई। 40 साल तक इस विषय पर शोध करने के बाद एक रिपोर्ट "रिइंकार्नेशन एंड बायोलॉजी" के नाम से तैयार हुई।

दूसरी शोध बंगलुरू की नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के तौर पर काम करते हुए डॉ. सतवंत पसरिया के निर्देशन में हुई।

टा. पसरिया ने भी एक "क्लेम्स ऑफ रिइंकार्नेशनर एम्पिरिकल स्टी ऑफ केसेज इन इंडिया" शीर्षक ले लिखी। इसमें भारत में हुई 500 पुनर्जन्म की घटनाओ का उल्लेख है। लेकिन ‌इन रिपोर्टो और निष्कर्षों को वैज्ञानिक मान्यता नहीं मिल सकी है। उस दिशा में अभी काम होना बाकी है।

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