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Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   The Timeless Teachings of Guru Nanak Dev Ji A Guiding Light for Life Even Today

Guru Nanak Dev Ji Teachings: क्यों आज के समय में गुरु नानक देव जी की सीख है उतनी ही जरूरी, जानें यहाँ

Sat, 01 Nov 2025 12:34 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 01 Nov 2025 12:34 PM IST
सार

GuruNanak Dev Teachings: गुरु नानक देव जी सिख धर्म के पहले गुरु थे और वे अंधविश्वास व पाखंड के कट्टर विरोधी थे। हर साल उनके प्रकाश उत्सव पर श्रद्धालु ननकाना साहिब जाकर उन्हें याद करते हैं।

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The Timeless Teachings of Guru Nanak Dev Ji A Guiding Light for Life Even Today
Guru Nanak Dev Jayanti - फोटो : amar ujala

विस्तार

Guru Nanak Dev Ji Ki Shikshaein: गुरु नानक देव जी सिख धर्म के पहले गुरु थे और उनके उपदेश आज भी लोगों के जीवन में मार्गदर्शन का स्रोत हैं। वे अंधविश्वास, पाखंड और आडंबरों के कट्टर विरोधी थे। उनके विचार सरलता, ईमानदारी, भक्ति और मानवता पर आधारित थे। गुरु नानक का जन्म 15 अप्रैल 1469 को पंजाब के तलवंडी नामक गाँव में एक किसान के घर हुआ था। जन्म से ही उनके मस्तक पर तेज आभा के संकेत दिखाई देते थे, जो उनके दिव्य व्यक्तित्व का परिचायक था।

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तलवंडी, जो वर्तमान में पाकिस्तान के लाहौर से लगभग 30 मील पश्चिम में स्थित है, बाद में गुरु नानक के नाम से जुड़कर ननकाना साहिब कहलाया। हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा को गुरु नानक के प्रकाश उत्सव के अवसर पर भारत सहित दुनिया भर से सिख श्रद्धालु ननकाना साहिब जाकर वहां अरदास करते हैं और उनके जीवन व शिक्षाओं को याद कर उनका सम्मान करते हैं। यह उत्सव उनके दिव्य जीवन और मानवता संदेश का प्रतीक माना जाता है।
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The Timeless Teachings of Guru Nanak Dev Ji A Guiding Light for Life Even Today
Guru Nanak Jayanti 2025 - फोटो : freepik

गुरु नानक जी की शिक्षा का सार
गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन और उपदेशों के माध्यम से एक उच्च आध्यात्मिक संदेश दिया। उनका मूल सिद्धांत यह है कि परमात्मा एक है, अनन्त है, सर्वशक्तिमान है और सत्य है। वह केवल किसी मंदिर या मूर्ति में नहीं, बल्कि सर्वत्र व्याप्त है। प्रत्येक जीव, प्रत्येक स्थान और प्रत्येक परिस्थिति में। इसलिए गुरु नानक जी ने मूर्ति पूजा और अनावश्यक अनुष्ठानों को निरर्थक बताया। उनकी शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है नाम-स्मरण (ईश्वर का नाम जपना)। गुरु नानक जी के अनुसार, ईश्वर का नाम केवल गुरु की शरण में जाकर ही प्राप्त किया जा सकता है। उनके उपदेशों में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का समन्वय मिलता है। गुरु नानक जी ने अपने अनुयायियों के लिए जीवन को सही दिशा में जीने के दस मूल सिद्धांत बताए हैं। 

The Timeless Teachings of Guru Nanak Dev Ji A Guiding Light for Life Even Today
Guru Nanak Jayanti 2025 - फोटो : freepik
  • ईश्वर एक है:  गुरु नानक जी ने स्पष्ट किया कि संसार में एक ही ईश्वर है। वह सभी का सृष्टिकर्ता और पालनहार है। विभिन्न नामों और रूपों में उसका ध्यान रखा जा सकता है, लेकिन उसका स्वरूप एक ही है।
  • सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो: ईश्वर की भक्ति में स्थिरता और निष्ठा आवश्यक है। गुरु नानक जी ने अनुयायियों को सलाह दी कि वे केवल एक ईश्वर की भक्ति करें और किसी भी अन्यत्र विचलित न हों।
  • ईश्वर सब जगह और प्राणी मात्र में मौजूद है: ईश्वर केवल मंदिरों या विशेष स्थलों में नहीं है। वह हर जीव, हर वस्तु और हर परिस्थिति में विद्यमान है। इसलिए हमें हर जगह और हर व्यक्ति में ईश्वर की उपस्थिति को पहचानने का प्रयास करना चाहिए।
  • ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नहीं रहता: सच्चे भक्तों का मन साहसपूर्ण और निर्भय होता है। गुरु नानक जी के अनुसार, ईश्वर की भक्ति करने वाला व्यक्ति भय, चिंता और अविश्वास से मुक्त होता है।
  • ईमानदारी से और मेहनत करके उदरपूर्ति करनी चाहिए: गुरु नानक जी ने कहा कि जीवन में केवल भिक्षा या आलस्य से जीविका नहीं चल सकती। व्यक्ति को मेहनत और ईमानदारी के साथ कमाई करनी चाहिए।
  • बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न किसी को सताएं: नकारात्मक विचारों और कर्मों से दूर रहना चाहिए। दूसरों को नुकसान पहुँचाने या पीड़ा देने की सोच भी अनुचित है।
  • सदैव प्रसन्न रहना चाहिए और ईश्वर से क्षमा मांगनी चाहिए: आनंद और संतोष जीवन के मूल भाव हैं। गुरु नानक जी ने सिखाया कि हमेशा प्रसन्नचित्त रहना चाहिए और किसी भी गलती के लिए ईश्वर से क्षमा मांगनी चाहिए।
  • मेहनत और ईमानदारी की कमाई में से ज़रूरतमंद को भी कुछ देना चाहिए: सिर्फ अपने लिए कमाना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरतमंदों की मदद करना, समाज में सहयोग करना और दान करना गुरु नानक जी की शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • सभी स्त्री और पुरुष बराबर हैं: गुरु नानक जी ने समाज में लैंगिक समानता की शिक्षा दी। उन्होंने बताया कि स्त्री और पुरुष दोनों बराबर हैं और समाज में उनकी समान भूमिका होनी चाहिए।
  • भोजन शरीर को जि़ंदा रखने के लिए ज़रूरी है, पर लोभ-लालच बुरी है:  भोजन आवश्यक है, लेकिन अत्यधिक भोग-विलास, लालच और संग्रहवृत्ति अनुचित हैं। संतुलित और सरल जीवन जीना चाहिए।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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