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सीख: जीवन में पैसा ही सबसे महत्वपूर्ण चीज नहीं है
अमर उजाला संपादकीय
Updated Thu, 28 Dec 2017 08:53 AM IST
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मेधांश अपने दादा के साथ सैर करने निकला था। वह दस साल का था। उसने दादा से कहा, दादा जी, मैं भी बड़ा होकर पापा की तरह खूब पैसा कमाऊंगा, जिससे हम सब खुश रह सकें। दादा जी बोले, यह तुमसे किसने कहा कि पैसों से खुशी आती है? मेधांश बोला, लेकिन दादा जी, अगर पैसे नहीं होंगे, तो खुशी भी तो नहीं होगी न। दादाजी बोले, चलो, एक खेल खेलते हैं। मैं सवाल पूछूंगा, तुम अपने को उस स्थिति में कल्पना कर सवाल का जवाब देना।
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सोचो कि अपने पापा की तरह तुम सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक हो। तुम्हारे पास घर है, गाड़ी है, सुखी परिवार है। तुम्हारी कंपनी को तुमसे बहुत उम्मीदें हैं। वह चाहती है कि तुम कम से कम समय में अपना लक्ष्य पूरा करो। तब तुम्हारे लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या होगा? मेधांश बोला, लक्ष्य। फिर दादा जी ने पूछा, सोचो कि तुम एक छोटी कंपनी में नौकरी करते हो। तुम्हारे पास कुछ पैसे जमा हैं, जो तुमने अपनी कंपनी खोलने के लिए इकट्ठा किए हैं। पर अचानक तुम्हारे परिवार में किसी की तबीयत खराब हो गई है और तुम्हारे पैसों की जरूरत है। उस वक्त तुम्हारे लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या होगा? मेधांश बोला, मैं यही चाहूंगा कि किसी भी तरह मेरे परिवार का सदस्य बच सके।
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दादा जी बोले, शाबाश। अच्छा अब यह सोचो कि तुम एक कंपनी में मजदूर हो। तुम्हारे पास न घर है, न गाड़ी। एक परिवार है, जो खाने के लिए तुम्हारे ऊपर निर्भर है। तुम दिन रात मेहनत करते हो और जो भी मिलता है, वह अपने घर पर देते हो। तब तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण क्या होगा? मेधांश बोला, मेरा परिवार, जिसके लिए मैं यह सब कर रहा हूं।
दादा जी ने अगला सवाल पूछा, सोचो कि तुम एक मजदूर के बेटे हो। तुम्हारे पिता दिन-रात मजदूरी कर कुछ पैसे कमाकर घर लाते हैं, जिससे तुम कुछ खा सको। तब तुम्हारे लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या होगा? मेधांश बोला, मेरे पिता जी का समय। दादाजी ने पूछा, क्या अब भी तुम्हारे लिए पैसा सबसे महत्वपूर्ण है?
अमर उजाला के हरियाली और रास्ता पन्ने से साभार