सीख: नए विचारों से ही मिलती है जीवन जीने की राह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसी भी कार्य को शुरू करने की पहली सीढ़ी होती है, विचार। एक विचार, व्यक्ति के जीवन की दशा एवं दिशा दोनों बदल सकता है। सबसे मुश्किल है विचार के अनुसार काम करना। स्वामी विवेकानंद का कहना है, 'मन में एक विचार लो और उस विचार को अपनी जिंदगी बना लो, उसके बारे में सोचो, उसके ही सपने देखो और उस विचार को जियो। आपका मन, आपके शरीर का हर अंग और मांसपेशियां, सभी उस विचार में हों और दूसरे अन्य विचार उसे भटका न पाएं। यही सफलता का रास्ता है।' किसी विचार को सफलता में तब्दील करने की राह में कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ता है।
पढ़ें- सीख: हमारा नजरिया ही हमारा भविष्य तय करता है
कहें, हां मैं कर सकता हूं
दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, एक वे, जो सोचते हैं 'मैं यह नहीं कर सकता'। दूसरे वे, जो कहते हैं, 'हां, मैं कर सकता हूं'। जब कोई इस विचार के साथ अपनी सफलता की मंजिल को तय करता है कि हां, मैं यह कर सकता हूं, तो उसके लिए रास्ते में आने वाली चुनौतियों को स्वीकारना मुश्किल नहीं होता।
निराशावादी नहीं, बनें आशावादी
जीवन में विचारों का महत्व बहुत है, लेकिन कैसे विचार हमें सफल बना सकते हैं? किन विचारों को अपनाना चाहिए, किनसे बचना चाहिए? इसका निश्चय करना भी जरूरी है। विचार दो प्रकार के होते हैं- सकारात्मक और नकारात्मक। हालांकि, हर कोई अपने काम की शुरुआत तो सकारात्मक सोच के साथ ही करता है, लेकिन बीच में आने वाली परेशानियों से हार जाता है। यहीं पर जरूरत है सोचने की। कभी भी सकारात्मकता पर नकारात्मकता को हावी न होने दें। यदि आप असफल होते हैं, तो असफलता के कारण को जानने का प्रयास करें। उस गलती को न दोहराते हुए, उसमें आगे बढ़ने का प्रयास करें। निराशावादी नहीं, आशावादी बनें। निराशावादी व्यक्ति को हर अवसर में कठिनाई दिखती है, वहीं आशावादी व्यक्ति को हर कठिनाई में अवसर दिखता है। आशावादी होने का मतलब यह नहीं है कि आप समस्याओं के प्रति जागरूक ही न हों। किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले सकारात्मकता के साथ उसके नकारात्मक पक्षों पर भी विचार करें।
अमर उजाला के खुला पन्ना से साभार