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नाशवान चीजों से उपजी खुशी कब तक देगी साथ

Fri, 12 Jan 2018 12:00 PM IST
संत राजिन्दर सिंह
संत राजिन्दर सिंह Updated Fri, 12 Jan 2018 12:00 PM IST
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How long will happiness stayed which you recieve from destructive things
happiness from artificial things
प्रगति और खुशी की तलाश सभी को है, हर कोई इसकी तलाश कर रहा है। आखिर दुखी तो कोई नहीं होना चाहता। लोग अलग-अलग तरीकों से खुशियां पाने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग दौलत और भौतिक चीजों में खुशियां ढूंढते हैं, तो कुछ नाम, शोहरत और रिश्तों में इसे खोजते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो शराब और अन्य नशीले पदार्थों में खुशियां ढूंढने की कोशिश करते हैं।
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ज्यादातर लोग, अपनी इच्छाएं पूरी करके खुशी पाना चाहते हैं। हमारी इच्छा एक कार खरीदने की हो सकती है, घर खरीदने की हो सकती है। जिंदगी भर हम एक के बाद दूसरी इच्छा की पूर्ति में ही लगे रहते हैं। होता क्या है कि हमारी इच्छाएं कभी खत्म ही नहीं होतीं। 
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जैसे ही एक इच्छा पूरी होती है, दूसरी इच्छा हमारे अंदर जाग जाती है। जब हम वो पूरी कर लेते हैं, तो कोई अन्य इच्छा उसकी जगह ले लेती है। हमारा जीवन ऐसे ही चलता रहता है। यह सच है कि आधुनिक संस्कृति आज हमारे मन में नई-नई इच्छाओं को जन्म देती जा रही है। रेडियो, टेलीविजन आदि पर विज्ञापनों की होड़ लगी रहती है। विज्ञापनकर्ता हमें बताते हैं कि हमारे पास फलां इलैक्ट्रॉनिक सामान होना चाहिए, ऐसी नई गाड़ी होनी चाहिए। 
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​वो हमारे अंदर यह भावना जगाते हैं कि जब तक हम इन चीजों को खरीद नहीं लेते, तब तक हमारा जीवन अधूरा ही है। हम थोड़ी देर के लिए इनसे खुशी प्राप्त करते हैं, लेकिन जीवन के किसी न किसी मोड़ पर हमें एहसास होता है कि बाहरी संसार की खुशी एक क्षणिक भ्रम ही है। इस संसार की हरेक चीज नाशवान है। चूंकि हमारी इंसानी व्यवस्था को इस प्रकार रचा गया है कि हम इच्छाओं की पूर्ति करने की ओर ही ध्यान लगाए रहते हैं।

सही प्रकार की इच्छा के लिए क्या जरूरी है? हमें एक लक्ष्य का चयन करना चाहिए। सही लक्ष्य है प्रभु को पाना। अपनी आत्मा का मिलाप परमात्मा से करवाना। हम अपना अमूल्य जीवन, सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति में ही बर्बाद कर देते हैं। अंत में हमें महसूस होता है कि उनमें से किसी भी चीज ने हमें वो स्थाई खुशी, प्रेम, और संतुष्टि नहीं दी, जो हम वास्तव में चाहते थे।
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