आपको भी लगता है भगवान नहीं हैं, जरा इस सच को जान लीजिए
आज के युग में भौतिकता अधिक हावी हो गई इसलिए ईश्वर के अस्तित्व को लेकर काफी सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में एक यह कहना होगा कि यदि कोई परमात्मा नहीं है तो उसके विरोध में इतना प्रचार क्यों है? क्या है इसका अर्थ? इसमें तो कोई अर्थ नहीं दिखाई पड़ता, यदि परमात्मा है ही नहीं तो बात खत्म। चिंतित क्यों होना?
परमात्मा विरोधी प्रचार, साहित्य, यह और वह, इसे सिद्ध करने की कोशिश ही क्यों? यह सारा प्रयास यही प्रदर्शित करता है कि शायद वहां कुछ हो, कुछ हो, सकता है वहां।’ उसे संदेह हो गया। और जब संदेह हो जाता है तो व्यक्ति जानने की कोशिश करता है कि उसकी वजह क्या है।
अगर किसी विषय वस्तु या शक्ति का अस्तित्व ही नहीं है तो उसके बारे में सोचने का क्या फायदा। अगर ध्यान जाता है तो किसी न किसी स्तर पर वह मौजूद जरूर है।