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इस प्रेम के आगे दुनिया के सारे प्रेम फीके पड़ जाएंगे
रजिंदर सिंह
Updated Sat, 29 Nov 2014 03:45 PM IST
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प्रत्येक मनुष्य की एक मूल आवश्यकता है कि वह प्रेम कर सके। और प्रेम पा सके। जब मनोवैज्ञानिक मनुष्य की मूल आवश्यकताओं की बात करते हैं तो भोजन, कपड़ा, मकान और सुरक्षा के साथ साथ वे प्रेम की जरूरत को इसमें शामिल करते हैं। साधारणतया व्यक्ति बाहरी दुनिया में अपने माता-पिता, भाई बहनों और रिश्तेदारों से प्रेम पाने की उम्मीद करते हैं।
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दुर्भाग्य से जीवन में कभी कभी हम यह सीखते हैं कि ये प्रेम अस्थाई हो सकते हैं। संबंध बदलते रहते हैं। बच्चे दूर चले जाते हैं। और माता पिता गुजर जाते हैं। किसी न किसी समय पर इस दुनिया के प्रेम के खो जाने पर, हमें दुख का एहसास अवश्य होता है।
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अक्सर दुनियावी प्रेम के खो जाने पर हम दिलासा के लिए प्रभु की ओर मुड़ते हैं। जब प्रभु हमारी पुकार को सुनते हैं, तो वे हमें किसी ऐसे व्यक्ति के पास भेज देते हैं, जो हमें महसूस करा सकता है कि हमारे भीतर शाश्वत प्रेम सदा विद्यमान रहता है। एक सत्गुरु हमें प्रभु के प्रेम से जोड़ देता है।
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सद्गुरुओं ने जो युग युगों से आते रहे हैं, हमें शाश्वत प्रेम पाने का तरीका बताया है। वे हमे ध्यानाभ्यास सिखाते हैं। ताकि हम अपने भीतर प्रभु का प्रेम पा सकें। क्योंकि हम बाहरी आंखों से प्रभु के दर्शन नहीं कर सकते। एक सत्गुरु हमें प्रभु को अंतर की आंख से देखना सिखाते हैं।
जब हम अध्यात्म पथ पर अग्रसर होते हैं, हम प्रभु के प्रेम का अनुभव करते हैं। प्रभु प्रेम है और हमारे भीतर बसती आत्मा भी प्रेम है। जब व्यक्ति किसी सद्गुरु के पास आते हैं, वे उस प्रेम का पान कर सकते हैं। सद्गुरु प्रभु के प्रेम को हमारी ओर प्रसारित करते हैं। वह सत्गुरु की दयाधारा के द्वारा स्वतः हमारी ओर आता है और हमारी आत्मा को सराबोर कर देता है।
किसी वक्ता के द्वारा दिया गया व्याख्यान सुनते हुए हम बौद्धिक ज्ञान प्राप्त करते हैं। जब हम एक आध्यात्मिक गुरु के पास जाते हैं वहां हम बौद्धिक ज्ञान से कहीं अघिक पाते हैं। सद्गुरु की संगत में शरीर के ऊपर उठने का अनुभव प्राकृतिक रूप से मिलता है। वह दया धारा एक ऊर्जा है, जो हमारे ख्याल को शरीर से दिव्य चक्षु पर खींच लाती है।
सत्गुरु की तवज्जोह हमें भीतर से झकझोर कर देती है। यह आह्लादकारी और अनुपम दिव्य अनुभव आत्मा का उत्थान कराता है। हम सबसे उत्कृष्ट प्रेम से सरोबार हो जाते हैं। इसके सामने दुनियावी आकर्षण स्वादहीन प्रतीत होते हैं।