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Datta Jayanti 2019: दत्तात्रेय जयंती क्यों मनाई जाती है?

Wed, 11 Dec 2019 04:12 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Wed, 11 Dec 2019 04:12 PM IST
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Datta Jayanti 2019 Why celebrate Datta Jayanti Today
दत्ता जयंती 2019
हर साल मार्गशीर्ष की पूर्णिमा तिथि को भगवान दत्तात्रेय जयंती मनायी जाती है। इसी दिन ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का स्वरूप कहे जाने वाले दत्ता जी का जन्म हुआ था। भगवान दत्तात्रेय के स्वरूप को देखा जाए तो उनकी छह भुजाएं और तीन मुख हैं। वे त्रिदेव के अंश हैं। आज के दिन भगवान दत्ता के बाल्यरूप की आराधना की जाती है। दक्षिण भारत में भगवान दत्तात्रेय की अधिक मान्यता है। आज के दिन लोग उनका आशीर्वाद पाने के लिए व्रत एवं पूजा आराधना करते हैं। आइए जानते हैं भगवान दत्तात्रेय से जुड़ी पौराणिक कथा और व्रत विधि।
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Datta Jayanti 2019 Why celebrate Datta Jayanti Today
नारद जी - फोटो : Social Media

ऐसे हुआ था भगवान दत्तात्रेय का जन्म
पौराणिक मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि एक बार मां पार्वती, लक्ष्मी और माता सरस्वती को अपने पतिव्रत धर्म पर बहुत अधिक अभिमान हो गया था। नारद मुनि तीनों देवियों के इस अभिमान को तोड़ना चाहते थे। वे बारी-बारी से तीनों देवियों के पास गए और उनके सामने माता अनसूया के पतिव्रत धर्म का गुणगान किया। जब तीनों देवियों ने ये सुना तो उन्हें माता अनसूया से ईर्ष्या होने लगी। उन्होंने त्रिदेवों को ये कहा कि वे जाकर माता अनसूया के पतिव्रत धर्म को तोड़ें। 

देवियों की जिद में त्रिदेव माता अनसूया के पतिव्रत धर्म को तोड़ने के लिए पहुंच गए। इधर माता अनसूया को इसकी भनक लग गई। उन्होंने अत्रि ऋषि के चरणों का जल उन पर छिड़क दिया। इससे त्रिदेव अपने बाल रूप में आ गए। अब माता अनसूया उन्हें संतान की तरह पालने लगीं। जब तीनों देवियों को अपनी गलती का अहसास हुआ तो तीनों ने माता अनसूया से क्षमा मांगी। माता ने कहा कि इन तीनों ने मेरा दूध पीया है, इसलिए इन्हें बालरूप में ही रहना होगा। यह सुनकर तीनों देवों ने अपने-अपने अंश को मिलाकर एक नया अंश पैदा किया, जिनका नाम दत्तात्रेय रखा गया।

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Datta Jayanti 2019 Why celebrate Datta Jayanti Today
दत्ता जयंती 2019 - फोटो : अमर उजाला
दत्तात्रेय जयंती के दिन क्या करें
  • आज के दिन दत्तात्रेय भगवान की आराधना करनी चाहिए।
  • दत्तात्रेय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए।
  • आज का दिन मांस-मछली, शराब इत्यादि चीजों का सेवन न करें।
  • दत्तात्रेय के साथ आज के दिन तीनों देवताओं की पूजा करें।
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