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Mokshada Ekadashi 2019: जानिए मोक्षदायिनी एकादशी का महत्व और व्रत कथा

Sat, 07 Dec 2019 07:28 AM IST
रुस्तम राणा पं. राम मणि पांडेय
पं. राम मणि पांडेय Published by: रुस्तम राणा Updated Sat, 07 Dec 2019 07:28 AM IST
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Vrat katha of Mokshada Ekadashi 2019
मोक्षदा एकादशी व्रत 2019 - फोटो : Rohit

मोक्षदा एकादशी का तात्पर्य है मोह का नाश करने वाली। इसलिए इसे मोक्षदा एकादशी कहा गया है। द्वापर युग में इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता ज्ञान दिया था। अत: इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। मोक्षदा एकादशी के दिन मानवता को नई दिशा देने वाली गीता का उपदेश हुआ था। श्रीमद् भागवत गीता एक महान ग्रन्थ है। भागवत गीता के पढ़ने से अज्ञानता दूर होती है। मनुष्य का मन आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होता है। इसके पठन-पाठन और श्रवण से जीवन को एक नई प्रेरणा मिलती है। मोक्षदा एकादशी व्रत के प्रभाव से मनुष्य के पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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Vrat katha of Mokshada Ekadashi 2019
प्रतीकात्मक

मोक्षदा एकादशी का व्रत
मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान श्री कृष्ण, महर्षि वेद व्यास और श्रीमद् भागवत गीता का पूजन किया जाता है। वहीं इस व्रत को करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी का जो व्रत करते हैं। उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और अन्त में स्वर्गलोक को जाते हैं।इस व्रत से बढ़कर मोक्ष देने वाला दूसरा कोई भी व्रत नहीं है इस कथा को सुनने व पढ़ने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।

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Vrat katha of Mokshada Ekadashi 2019
प्रतीकात्मक
मोक्षदा एकादशी की कथा
एक समय गोकुल नगर में वैखानस नामक राजा राज्य करता था। एक दिन राजा ने स्वप्न में देखा कि उसके पिता नरक में दुख भोग रहे हैं और अपने पुत्र से उद्धार की याचना कर रहे हैं। अपने पिता की यह दशा देखकर राजा व्याकुल हो उठा। प्रात: उठकर राजा ने ब्राह्मणों को बुलाकर अपने स्वप्न के बारे पूछा। तब ब्राह्मणों ने कहा कि, हे राजन्! यहां से कुछ ही दूरी में वर्तमान, भूत, भविष्य के ज्ञाता पर्वत नाम के एक ऋषि का आश्रम है। आप वहां जाकर अपने पिता के उद्धार का उपाय पूछा लिजिए। राजा ने ऐसा ही किया।
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जब पर्वत मुनि ने राजा की बात सुनी तो वे एक मुहूर्त के लिए नेत्र बन्द किए। उन्होंने कहा कि- हे राजन! पूर्वजन्मों के कर्मों की वजह से आपके पिता को नर्कवास प्राप्त हुआ है। अब तुम मोक्षदा एकादशी का व्रत करो और उसका फल अपने पिता को अर्पण कर दो, तो उनकी मुक्ति हो सकती है। राजा ने मुनि के कथनानुसार ही मोक्षदा एकादशी का व्रत किया। ब्राह्मणों को भोजन, दक्षिणा और वस्त्र आदि अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद व्रत के प्रभाव से राजा के पिता को मोक्ष की प्राप्ति हुई।
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